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Chaiti Chhath: 22 मार्च से शुरू होगा सूर्य उपासना का महापर्व, अर्घ्य के समय करें 108 नामों का जप

Chaiti Chhath
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Chaiti Chhath : भारतीय परंपरा में छठ पर्व को आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। एक कार्तिक महीने में और दूसरा चैत्र मास में, जिसे चैती छठ कहा जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च 2026 से होगी और चार दिन तक चलने के बाद 25 मार्च को इसका समापन होगा। इस दौरान श्रद्धालु सूर्य देव और छठी मैया की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतानों के कल्याण की कामना करते हैं।

छठ पर्व की खासियत यह है कि इसमें व्रती बेहद कठिन नियमों का पालन करते हैं। पहला दिन ‘नहाय-खाय’ से शुरू होता है, जब घर की शुद्धता और पवित्र भोजन से व्रत की शुरुआत की जाती है।

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दूसरे दिन ‘खरना’ होता है, जिसमें व्रती पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जबकि चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है। इस दौरान नदी, तालाब या घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना होती है।

छठ पर्व केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि प्रकृति और सूर्य ऊर्जा के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। सूर्य को जीवनदाता माना जाता है, क्योंकि धरती पर ऊर्जा और जीवन का मुख्य स्रोत वही हैं। छठ पूजा के दौरान सुबह और शाम सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार सुबह की धूप शरीर को ऊर्जा देती है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

108 नामों के जप

छठ पूजा में सूर्य देव के 108 नामों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अर्घ्य देते समय इन नामों का जप करने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन नामों में ‘भास्कर’, ‘रवि’, ‘आदित्य’, ‘विवस्वान’, ‘भानु’, ‘हिरण्यगर्भ’, ‘तेजोरूप’, ‘नारायण’, ‘परमात्मा’ और ‘जगत्पति’ जैसे कई पवित्र नाम शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नामों का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।

छठ पर्व को सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि इसमें स्वच्छता और नियमों का बहुत कड़ाई से पालन किया जाता है। व्रती चार दिनों तक जमीन पर सोते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। प्रसाद भी पूरी तरह सात्विक तरीके से बनाया जाता है। ठेकुआ, फल, गुड़, गन्ना और नारियल जैसे प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान घरों और घाटों की सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

विदेशों में भी बढ़ी छठ की लोकप्रियता

पहले छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता था, लेकिन अब इसकी लोकप्रियता पूरे देश में फैल चुकी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग छठ मनाते हैं। इतना ही नहीं, विदेशों में बसे भारतीय भी इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। कई जगहों पर कृत्रिम घाट बनाकर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है।

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम

छठ पर्व भारतीय संस्कृति में आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का अनूठा उदाहरण है। यह पर्व परिवार और समाज को जोड़ने का भी माध्यम बनता है। व्रती पूरे विश्वास और भक्ति के साथ सूर्य देव से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई छठ पूजा हर मनोकामना को पूर्ण करने वाली होती है, इसलिए हर साल लाखों श्रद्धालु इस महापर्व का इंतजार करते हैं।

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