Donald Trump : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान पिछले कई महीनों से खाड़ी क्षेत्र के देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान और सऊदी अरब की दिशा में बड़ी संख्या में मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। उनका कहना है कि ईरान का मकसद पूरे मध्य पूर्व में दबदबा बनाना था।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने करीब चार महीनों तक खाड़ी देशों की ओर लगभग 1200 मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं थीं, बल्कि क्षेत्रीय नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा थीं।
Donald Trump का दावा
ट्रंप के अनुसार, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव की तस्वीर जरूर सामने आती है। ट्रंप का बयान उस समय आया है जब ईरान में हालिया हमलों के बाद नेतृत्व को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में हुए हमलों में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर आई थी। इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता माना जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि हमले में वह घायल हो गए थे। ट्रंप ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं, हालांकि उनकी हालत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
जहाजों को न डरने की सलाह
ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में डरने की जरूरत नहीं है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की नौसेना की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है और उसके कई जहाज नष्ट किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सामान्य रूप से आवाजाही जारी रखनी चाहिए।
तनाव बरकरार
हालांकि, ट्रंप के बयानों के बावजूद मध्य पूर्व में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इस टकराव का असर लगातार देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक समाधान जल्दी नहीं निकला तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।
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