US-Iran Conflict : मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक हवाई यातायात पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज होने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर में 3,000 से अधिक फ्लाइट्स रद्द हो चुकी हैं। इसके चलते हजारों यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट और ट्रांजिट शहरों में फंसे हुए हैं और उन्हें अपनी आगे की यात्रा को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। कुछ जगहों पर एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद किया गया है, जबकि कई रूट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
US-Iran Conflict
इस वजह से एयरलाइंस को या तो उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं या फिर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे बड़े ट्रांजिट हब पर परिचालन दबाव अचानक बढ़ गया है। इस संकट में यात्रियों के सामने एक और बड़ी समस्या ट्रैवल इंश्योरेंस को लेकर सामने आई है। एविएशन और बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘वॉर एक्सक्लूजन’ क्लॉज होता है। इसका मतलब यह है कि युद्ध, सैन्य कार्रवाई या नागरिक अशांति से जुड़े नुकसान को बीमा कंपनियां कवर नहीं करतीं। ऐसे में फ्लाइट रद्द होने या यात्रा बाधित होने की स्थिति में यात्रियों को आर्थिक नुकसान खुद उठाना पड़ सकता है।
भारत के एयर रूट भी प्रभावित
खाड़ी देश भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के प्रमुख मार्ग हैं, इसलिए इस संकट का असर भारतीय उड़ानों पर भी पड़ने लगा है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट से कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स रद्द होने की खबरें सामने आई हैं। भारतीय एयरलाइंस ने यात्रियों को रीबुकिंग और रिफंड का विकल्प दिया है, लेकिन होटल बुकिंग या आगे की यात्रा से जुड़े खर्च की भरपाई को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं है।
लंबे रूट से बढ़ रही लागत
एयरलाइंस को अब प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से बचते हुए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे उड़ान का समय दो से तीन घंटे तक बढ़ रहा है। लंबे रूट की वजह से ईंधन खपत और परिचालन लागत भी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय टिकटों की कीमतों और बीमा प्रीमियम पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके साथ ही यात्रियों का भरोसा भी लंबी दूरी की हवाई यात्रा पर कमजोर पड़ सकता है।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)
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