Gas vs Induction : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब ऊर्जा बाजार तक पहुंच चुका है। खाड़ी क्षेत्र में चल रही इस खींचतान से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। भारत जैसे देशों पर इसका असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एलपीजी की सालाना खपत करीब 31 मिलियन टन है और इसमें लगभग 80 प्रतिशत गैस आयात के जरिए आती है।
मध्य-पूर्व से भारत और दक्षिण एशिया तक तेल-गैस पहुंचाने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहम भूमिका है। यही समुद्री रास्ता खाड़ी देशों से निकलने वाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य मार्ग माना जाता है।
Gas vs Induction
मौजूदा तनाव के बीच इस मार्ग को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से बाजार में चिंता का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सप्लाई बाधित होती है तो कीमतों और उपलब्धता दोनों पर असर पड़ सकता है। गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कई लोग अब खाना बनाने के दूसरे तरीकों पर विचार कर रहे हैं। खासकर इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस जैसे इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक कूकर, केटल और ओवन की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि इन उपकरणों का इस्तेमाल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि बिजली के हिसाब से इनका मासिक खर्च कितना पड़ सकता है।
इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कूकर का खर्च
इंडक्शन कुकटॉप आमतौर पर 1800 से 2000 वॉट तक बिजली खपत करता है। अगर इसे रोज करीब एक घंटे चलाया जाए तो लगभग दो यूनिट बिजली खर्च होती है। बिजली की दर 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट मानें तो रोजाना 14 से 16 रुपये और महीने में करीब 420 से 480 रुपये तक का खर्च आ सकता है। वहीं इलेक्ट्रिक राइस कूकर की बिजली खपत 700 से 1000 वॉट के बीच होती है। रोज 30 से 40 मिनट इस्तेमाल करने पर महीने का खर्च करीब 90 से 120 रुपये के आसपास बैठ सकता है।
केटल और ओवन का बिजली बिल
इलेक्ट्रिक केटल से पानी उबालना भी अपेक्षाकृत सस्ता पड़ सकता है। आमतौर पर 4-5 मिनट में पानी गर्म करने में करीब 0.1 यूनिट बिजली लगती है, यानी एक बार इस्तेमाल करने में लगभग 1 रुपये का खर्च आता है। दिन में कई बार इस्तेमाल करने पर भी महीने का खर्च 120 से 150 रुपये के आसपास रह सकता है। वहीं इलेक्ट्रिक ओवन करीब 2000 वॉट बिजली खपत करता है। रोज आधे घंटे चलाने पर महीने का बिल लगभग 200 से 240 रुपये तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गैस की कीमतें और बढ़ती हैं तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कुकिंग ऑप्शन ज्यादा लोकप्रिय हो सकते हैं।
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