Iran News : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और आक्रामक बना दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के शुरुआती दस दिनों में ही ईरान के भीतर हजारों ठिकानों पर हमले किए गए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उन ठिकानों को निशाना बनाना है जिन्हें तत्काल खतरा माना जा रहा था। इस अभियान की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को की गई थी और अब यह लगातार तेज होता जा रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अब तक करीब 5,000 लक्ष्यों को निशाना बनाया जा चुका है। इनमें सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और सैन्य संचार नेटवर्क शामिल हैं।
Iran पर अमेरिका के भीषण हमले
इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भी हमले किए गए। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों से ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है और उसकी सैन्य संरचना को भारी झटका लगा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस अभियान के दौरान ईरान की नौसेना को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 50 ईरानी जहाज या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह तबाह हो गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि समुद्री ठिकानों पर किए गए हमलों ने ईरान की नौसैनिक ताकत को कमजोर कर दिया है। इसी दौरान जारी एक वीडियो में भूमिगत मिसाइल लॉन्चर पर सटीक हमला करते हुए बड़ा धमाका भी दिखाया गया है।
किया जा रहा हमला
इस सैन्य अभियान में अमेरिका ने अपनी सबसे उन्नत तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल किया है। B-1, B-2 और B-52 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमानों के साथ F-15, F-16, F-18 और F-22 जैसे फाइटर जेट भी ऑपरेशन का हिस्सा हैं। इसके अलावा पैट्रियट और THAAD जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम, MQ-9 रीपर ड्रोन और नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर भी इस अभियान में तैनात किए गए हैं।
ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस युद्ध में अमेरिका ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है और संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम लक्ष्य हासिल होने तक कार्रवाई जारी रहेगी। दूसरी तरफ ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि वह लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि जब तक हमले जारी रहेंगे, तब तक कूटनीतिक बातचीत की कोई संभावना नहीं है।
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