Battlefield : चीन के हथियारों को लंबे समय तक पश्चिमी सिस्टम का किफायती और कारगर विकल्प बताया जाता रहा। मगर हाल की सैन्य कार्रवाइयों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलग-अलग मोर्चों पर हुई झड़पों और ऑपरेशनों में चीनी रडार, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। विश्लेषकों का कहना है कि बैटल-टेस्टेड कहे जाने वाले प्लेटफॉर्म असली लड़ाई की परिस्थितियों में टिक नहीं पाए।
7 मई 2025 को भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। Indian Air Force ने नियंत्रण रेखा पार किए बिना सटीक स्ट्राइक की। इस मिशन में BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और एयर-लॉन्च्ड हथियारों का इस्तेमाल हुआ।
Battlefield में बेनकाब ड्रैगन टेक्नोलॉजी
पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकाने और आतंकी कैंप निशाने पर रहे। महज 23 मिनट के अभियान ने दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाने की क्षमता (SEAD) का प्रदर्शन किया। पाकिस्तान ने लाहौर के पास YLC-8E “एंटी-स्टील्थ” रडार और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए थे। कागजों पर इनकी डिटेक्शन रेंज 450 किमी तक बताई गई थी। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के सामने ये टिक नहीं पाए। भारतीय सिस्टम और जैमिंग क्षमता ने रडार को निष्क्रिय किया, जिससे मिसाइलें बिना रोके लक्ष्य तक पहुंचीं। विश्लेषण में खराब इंटीग्रेशन और धीमे सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी कमियां सामने आईं।
जवाबी कोशिशें भी बेअसर
पाकिस्तान ने विंग लूंग-II ड्रोन और PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल से जवाब देने की कोशिश की। मगर भारतीय एयर डिफेंस आकाश-NG और MRSAM ने कई खतरों को हवा में ही रोक दिया। एक PL-15E मिसाइल बरामद होने के बाद विशेषज्ञों ने उसके गाइडेंस सिस्टम और रॉकेट मोटर में खामियां बताईं। इससे निर्यात संस्करण की गुणवत्ता पर भी चर्चा तेज हो गई।
रडार ऑफलाइन
जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला में “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” चलाया। बताया जाता है कि काराकस में हुई इस कार्रवाई के दौरान अमेरिकी बल बिना बड़े प्रतिरोध के लक्ष्य तक पहुंचे। वेनेजुएला के पास मौजूद चीनी JY-27A मीटर-वेव रडार और HQ-9 सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई रडार पहले से ऑफलाइन थे और फायर-कंट्रोल सॉफ्टवेयर में लैग की समस्या थी। इससे भारी निवेश के बावजूद एयर डिफेंस ढांचा कमजोर दिखा।
ईरान में HQ-9B की चुनौती
यूएस-इजरायल हमलों के बीच ईरान द्वारा खरीदा गया HQ-9B सिस्टम भी जांच के दायरे में है। यह 260 किमी एंगेजमेंट रेंज का दावा करता है, लेकिन स्टेल्थ प्लेटफॉर्म और स्टैंड-ऑफ हथियारों के सामने इसकी सीमाएं उजागर हुईं। रडार कवरेज में गैप और जैमिंग-रोधी क्षमता की कमी जैसी बातें सामने आईं। कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों ने फिक्स्ड लॉन्च पोजीशन के ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाया। विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या सिर्फ हार्डवेयर की नहीं, बल्कि नेटवर्क इंटीग्रेशन, सॉफ्टवेयर अपडेट और ऑपरेशनल ट्रेनिंग की भी हो सकती है। आधुनिक युद्ध में मल्टी-सेंसर फ्यूजन, तेज डेटा प्रोसेसिंग और मजबूत जैमिंग-रोधी सिस्टम अहम हैं। जहां ये तत्व कमजोर पड़े, वहां एयर डिफेंस पर दबाव बढ़ गया।
इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में चर्चा तेज है। कई देश, जो लागत के कारण चीनी सिस्टम की ओर झुक रहे थे, अब दोबारा मूल्यांकन कर रहे हैं। दूसरी ओर, भारत और पश्चिमी देशों के सिस्टम की मांग में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
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