Mahatma Gandhi Death Anniversary : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धा और स्मरण का माहौल रहा। 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाते हुए राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने बापू को नमन किया। इस अवसर पर सत्य, अहिंसा और नैतिक साहस की विरासत को याद किया गया, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी थी। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें “भारत की अमर आत्मा” बताया।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच हैं जो समय, सत्ता और परिस्थितियों से परे है। राहुल गांधी के मुताबिक, इतिहास में कई बार साम्राज्यवादी ताकतों, नफरत की राजनीति और अहंकार से भरी सत्ता ने गांधी की विचारधारा को दबाने की कोशिश की, लेकिन हर बार असफल रही।
Death Anniversary: महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि आज
राहुल गांधी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि गांधी जी ने देश को यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा और भय से कहीं अधिक प्रभावशाली अहिंसा और साहस होते हैं। उनके अनुसार, गांधी की सोच इसलिए अमर है क्योंकि वह भारत की आत्मा में बसती है और किसी भी दौर में प्रासंगिक बनी रहती है।
महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं – वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफ़रत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की।
मगर राष्ट्रपिता ने हमें आज़ादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताक़त से बड़ी सत्य की शक्ति होती है – और हिंसा व भय से… pic.twitter.com/Hm1frzS3jW
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 30, 2026
PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। सोशल मीडिया पर साझा संदेश में उन्होंने कहा कि बापू ने पूरी मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि अहिंसा में वह शक्ति है, जो बिना हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। उन्होंने गांधी जी के सिद्धांतों को आज के दौर में भी मार्गदर्शक बताया।
पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है, जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है।
अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥ pic.twitter.com/DOkI98wdYu
— Narendra Modi (@narendramodi) January 30, 2026
खरगे और कांग्रेस नेताओं का एक सुर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस अवसर पर कहा कि जिस नफरत ने बापू को हमसे छीना, उसका समाधान भी गांधी के रास्ते में ही निहित है। उन्होंने सत्य, प्रेम और अहिंसा को समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी बापू के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके मूल्यों को जीवित रखने की अपील की।
वैश्णव जन तो तेने कहिये जे
पीड़ परायी जाणे रे
पर-दुख्खे उपकार करे तोये
मन अभिमान ना आणे रेजिस नफ़रत ने हमें बापू से जुदा किया,
उसका तोड़ भी बापू की ही राह है…
सत्य का उजाला, अहिंसा की ताक़त, और प्रेम की करुणा।बलिदान दिवस पर राष्ट्रपिता को नमन। #MartyrsDay pic.twitter.com/WZf3vuPYzp
— Mallikarjun Kharge (@kharge) January 30, 2026
जयराम रमेश ने शेयर किए ऐतिहासिक संदर्भ
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शहीद दिवस के मौके पर आज़ादी के बाद के कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों का उल्लेख किया। उन्होंने 1948 के उस दौर के पत्रों और वक्तव्यों को याद किया, जिनमें नेहरू और पटेल ने सांप्रदायिक ताकतों की आलोचना की थी। रमेश ने कहा कि आज भी कुछ ताकतें गांधी की विचारधारा को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि यह सोच कभी समाप्त नहीं हो सकती।
Two days before Mahatma Gandhi was assassinated, Jawaharlal Nehru had written to Syama Prasad Mookerjee.
A few months later, on July 18 1948, Sardar Patel had also written to Syama Prasad Mookerjee.
Both are damning indictments of the self-declared custodians of nationalism.… pic.twitter.com/xnw0TBaVhC
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) January 30, 2026
के.सी. वेणुगोपाल का बयान
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि 1948 में आज ही के दिन दुनिया ने एक महान मार्गदर्शक को खो दिया था। उन्होंने आगाह किया कि भले ही कुछ लोग गांधी जी के योगदान को कमतर दिखाने का प्रयास करें, लेकिन उनके मूल्य भारत की चेतना और जनमानस में गहराई से बसे हुए हैं।
On this day in 1948, the greatest soul to ever guide India and the world was snatched away from us.
Today, on Martyrs Day, let’s remember Bapu’s eternal teachings of Satya and Ahimsa – and warn ourselves of the culture of hate and violence that gave rise to his assassins.
In… pic.twitter.com/XzgGNhsy5p
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) January 30, 2026
1948 का वह दिन
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या ने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया था। यह दिन सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि भारत के नैतिक इतिहास का एक निर्णायक क्षण माना जाता है। गांधी जी का बलिदान शांति, न्याय और मानवता के लिए एक स्थायी प्रेरणा बन गया। शहीद दिवस पर नेताओं ने एक स्वर में कहा कि गांधी की विरासत को मिटाना असंभव है, क्योंकि उनकी सोच समय के हर दौर में मानवता के लिए प्रकाशस्तंभ की तरह मार्गदर्शन करती रहेगी।
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