Magh Purnima:- माघ महीने का हिंदू धर्म में बहुत ही खास महत्व होता है। इस महीने में पड़ने वाली माघ पूर्णिमा का पर्व जल्द ही आने वाला है। माघ महीने की पूर्णिमा के दौरान भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करने का विधान है। माघ पूर्णिमा को अगर आप किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और दान आदि करते हैं तो ऐसे में सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है। माघ पूर्णिमा के दिन श्री हरी और मां लक्ष्मी की साधना करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके कई शुभ फल प्राप्त होते हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
कब मनाई जाएगी माघ पूर्णिमा?
माघ महीने की माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। इस दौरान अगर आप दान पुण्य करते हैं तो आपको कई लाभ प्राप्त होंगे ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन गुड, कंबल, ऊनी वस्त्र, घी, फल और अन्न का दान किया जाता है। जरूरतमंदों और गरीबों में दान जरूर करें इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही अगर आप माघ पूर्णिमा के दिन अष्टलक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करते हैं तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर आपको धन-धान्य से परिपूर्ण बना देती है साथ ही आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
॥ अष्टलक्ष्मी स्तोत्र॥
॥ आदिलक्ष्मि ॥
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि,चन्द्र सहोदरि हेममये
मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायनि,मञ्जुळभाषिणि वेदनुते।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित,सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्॥1॥
॥ धान्यलक्ष्मि ॥
अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि,वैदिकरूपिणि वेदमये
क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि,मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि,देवगणाश्रित पादयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥2॥
॥ धैर्यलक्ष्मि ॥
जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि,मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये
सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद,ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।
भवभयहारिणि पापविमोचनि,साधुजनाश्रित पादयुते
जय जय हे मधुसूधन कामिनि,धैर्यलक्ष्मी सदा पालय माम्॥3॥
॥ गजलक्ष्मि ॥
जय जय दुर्गतिनाशिनि कामिनि,सर्वफलप्रद शास्त्रमये
रधगज तुरगपदाति समावृत,परिजनमण्डित लोकनुते।
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित,तापनिवारिणि पादयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम्॥4॥
॥ सन्तानलक्ष्मि ॥
अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि,रागविवर्धिनि ज्ञानमये
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि,स्वरसप्त भूषित गाननुते।
सकल सुरासुर देवमुनीश्वर,मानववन्दित पादयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,सन्तानलक्ष्मी त्वं पालय माम्॥5॥
॥ विजयलक्ष्मि ॥
जय कमलासनि सद्गतिदायिनि,ज्ञानविकासिनि गानमये
अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर,भूषित वासित वाद्यनुते।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित,शङ्कर देशिक मान्य पदे
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,विजयलक्ष्मी सदा पालय माम्॥6॥
॥ विद्यालक्ष्मि ॥
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि,शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमयभूषित कर्णविभूषण,शान्तिसमावृत हास्यमुखे।
नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि,कामित फलप्रद हस्तयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम्॥7॥
॥ धनलक्ष्मि ॥
धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि-धिंधिमि,दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम,शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते।
वेदपूराणेतिहास सुपूजित,वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि,धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम्॥8॥
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