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Economic Survey 2026: ग्रोथ बना नया मानक, रिफॉर्म्स की रफ्तार पर सरकार का फोकस

Economic Survey 2026
Economic Survey 2026

Economic Survey 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और आगे की संभावनाओं की तस्वीर रखी। सर्वे के अनुसार, भारत की संभावित मध्यम अवधि की विकास दर अब 7% के आसपास पहुंच चुकी है, जो कुछ साल पहले 6.5% आंकी गई थी। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में हुए संरचनात्मक सुधारों ने देश की उत्पादन क्षमता को मजबूत किया है और तेज विकास अब अपवाद नहीं, बल्कि “न्यू नॉर्मल” बन चुका है।

आर्थिक सर्वे में माना गया कि वित्त वर्ष 2025-26 वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण रहा। बढ़ते टैरिफ, वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय तनावों ने निर्यातकों और विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव डाला। इसके बावजूद भारत ने इन हालातों को अवसर में बदलने की कोशिश की।

Economic Survey: ग्रोथ बना नया मानक

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू मांग, निवेश और नीति सुधारों ने अर्थव्यवस्था को संतुलन में बनाए रखा। सरकार ने रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% से 7.2% के बीच रखा है। यह संकेत देता है कि भारत आने वाले समय में भी दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। हालांकि, सर्वे यह भी मानता है कि वैश्विक मंदी, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय नीतिगत बदलावों से जोखिम बना रह सकता है।

मांग को मिला सहारा

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि महंगाई दर सरकार द्वारा तय अनुमानित दायरे के भीतर बनी हुई है। GST दरों में किए गए सुधारों और युक्तिकरण से उपभोक्ता मांग को सहारा मिला है। सरकार का आकलन है कि आने वाले वित्त वर्ष में घरेलू मांग और निवेश में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि, वैश्विक ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

कैपेक्स GDP के 4% तक

सरकार ने बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड स्तर का निवेश किया है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, पूंजीगत व्यय (Capex) अब GDP के करीब 4% तक पहुंच गया है। इसमें सड़कों, रेलवे और लॉजिस्टिक्स जैसी भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ डिजिटल इंडिया, UPI और फाइबर नेटवर्क जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से रोजगार, उत्पादकता और निजी निवेश तीनों को बढ़ावा मिलेगा।

मजबूत बैलेंस शीट

रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय परिवारों, कंपनियों और बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है। कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर की मजबूत बैलेंस शीट निवेश को गति दे रही है और क्रेडिट ग्रोथ के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है। इससे आर्थिक गतिविधियों को लंबे समय तक स्थिर सहारा मिलने की उम्मीद जताई गई है। छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने MSME सेक्टर के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाओं का विस्तार किया है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक, इससे छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए ऋण की उपलब्धता आसान हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि MSME सेक्टर को रोजगार सृजन, निर्यात और नवाचार का मजबूत आधार बनाया जाए।

कृषि पर फोकस

कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन को सर्वे में सकारात्मक बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि MSP, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और फसल बीमा योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती समग्र आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। आर्थिक सर्वे में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि निर्माण लागत घटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई नीतियां बनाई जाएंगी, ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें। “मेक इन इंडिया” को नई ऊर्जा देने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार से बढ़ेंगी संभावनाएं

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ट्रेड डील को सर्वे में एक बड़े अवसर के रूप में देखा गया है। सरकार का आकलन है कि इससे श्रम बाजार का विस्तार होगा, निर्यात बढ़ेगा और भारतीय निर्माताओं को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेंगे। अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील से भी व्यापारिक अनिश्चितता कम होने की उम्मीद जताई गई है। आर्थिक सर्वे से पहले प्रधानमंत्री ने सुधारों की निरंतर गति पर जोर देते हुए कहा कि सरकार की पहचान सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन रही है। “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की उपमा देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में नीतिगत सुधारों की रफ्तार और तेज की जाएगी, ताकि भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर सके।

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