Aravalli Hills SC Hearing : अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मोड़ पर कदम रखते हुए अपने ही पिछले महीने के आदेश पर रोक लगा दी है। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने अरावली की नई परिभाषा से जुड़े निर्देशों को फिलहाल स्थगित कर दिया। यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब पर्यावरण कार्यकर्ता और वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे थे कि नई परिभाषा के जरिए इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को खनन के लिए खोलने का रास्ता साफ हो सकता है।
दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की गई अरावली की नई परिभाषा को लेकर सवाल खड़े हुए थे। आरोप लगाए गए कि इसे बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन और सार्वजनिक परामर्श के तैयार किया गया।
Aravalli Hills पर अदालत का सख्त रुख
विशेषज्ञों का कहना था कि इस बदलाव से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली के बड़े हिस्से ‘गैर-अरावली’ घोषित हो सकते हैं, जिससे वहां अनियमित और अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक नई विशेषज्ञ समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक समिति की सिफारिशों और अदालत के पूर्व निर्देशों को लागू नहीं किया जाएगा। अदालत ने माना कि मौजूदा हालात में स्थिति को यथास्थिति में रखना ही उचित है।
केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ-साथ चार संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, विशेषज्ञों का एक नया और स्वतंत्र पैनल गठित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि पूरे मुद्दे का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की गई है। बता दें कि नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि अरावली क्षेत्र में किसी भी नई खनन गतिविधि से पहले सतत खनन की एक व्यापक योजना बनाई जाए। बीते दिनों हुई सुनवाई में केंद्र की ओर से कहा गया कि अदालत उस योजना को पहले ही स्वीकार कर चुकी है, लेकिन इस दावे पर अदालत ने आपत्ति जताई।
सीजेआई की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि समिति की रिपोर्ट और अदालत की टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा रही है। उनके अनुसार, यह स्पष्ट होना जरूरी है कि नई परिभाषा कहीं गैर-अरावली क्षेत्रों का दायरा बढ़ाकर अनियंत्रित खनन को तो बढ़ावा नहीं दे रही। इसी स्पष्टता के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय जरूरी बताई गई। इस फैसले के बाद एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस तेज हो गई है।
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