Jamui Train Accident : सिमुलतला और लहाबन के बीच बीती रात जो कुछ हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि कभी-कभी किस्मत इंसान से पहले चलती है। हालात ऐसे बने कि अगर समय की सुई जरा-सी भी आगे-पीछे होती, तो हजारों यात्रियों की जिंदगी हमेशा के लिए पटरी पर ही थम जाती। दरअसल, गोरखपुर से कोलकाता जा रही पूर्वांचल एक्सप्रेस के यात्री अनजाने में मौत के बेहद करीब पहुंचकर सुरक्षित लौट आए। आसनसोल से सीतामढ़ी की ओर जा रही सीमेंट लदी मालगाड़ी अचानक पटरी से उतर गई। भारी-भरकम डिब्बे अपनी लाइन छोड़ते हुए सीधे डाउन ट्रैक पर जा गिरे। यह वही ट्रैक था, जहां से कुछ ही पलों पहले यात्रियों से भरी पूर्वांचल एक्सप्रेस गुजर चुकी थी। इस दौरान पटरियां मुड़ गईं और सीमेंट से लदे डिब्बे इधर-उधर बिखर गए।
रेलवे के समय रिकॉर्ड इस हादसे की गंभीरता को और साफ कर देते हैं। रात 11:01 बजे पूर्वांचल एक्सप्रेस सिमुलतला स्टेशन पार कर चुकी थी। ठीक अगले मिनट, 11:02 बजे मालगाड़ी लहाबन स्टेशन से आगे बढ़ी। कुछ ही देर बाद दोनों स्टेशनों के बीच मालगाड़ी पटरी से उतर गई और डाउन लाइन पूरी तरह रूक हो गई।
Jamui Train Accident
ऐसे में यदि अगर पूर्वांचल एक्सप्रेस दो-तीन मिनट भी लेट होती या मालगाड़ी कुछ सेकेंड पहले हादसे का शिकार होती, तो टक्कर तय थी। उस स्थिति में न ट्रेन बचती, न ही यात्री बचते। केवल इतना ही नहीं, भारी डिब्बों और तेज रफ्तार ट्रेन की भिड़ंत रेलवे के इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिनी जाती। बता दें कि सिमुलतला और लहाबन के बीच की लगभग 9 किलोमीटर लंबी दूरी उस रात मानो मौत का रास्ता बन गई थी। डाउन ट्रैक पर फैले मलबे को देखकर साफ लग रहा था कि यह हादसा किसी बड़ी त्रासदी का इशारा था।
ट्रेने हुईं प्रभावित
हालांकि, मौके पर पहुंचे कर्मचारियों और अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि हादसे के वक्त यात्री ट्रेन वहां मौजूद नहीं थी। हजारों परिवार अनजाने में एक बड़े मातम से बच गए। फिलहाल, इस कारण बहुत सारी ट्रेने प्रभावित हो गई है।
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