Dharmik Yatra: देश में करोड़ों लोग हर साल अलग-अलग तीर्थों की यात्रा करते हैं। कई बार हम मुख्य मंदिर तक जाकर लौट आते हैं, जबकि मान्यताओं के अनुसार कुछ स्थान ऐसे हैं, जिन्हें साथ में देखना बेहद जरूरी माना गया है। माना जाता है कि ऐसा करने से ही यात्रा का फल पूरा मिलता है और दर्शन का पुण्य भी बढ़ता है। चलिए जानते हैं किस यात्रा के साथ कौन-कौन से दर्शन जुड़ते हैं।
वैष्णो देवी से लेकर खाटू श्याम तक… यहां से जुड़ी पुरानी परंपराएं बताती हैं कि यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब इन जोड़े हुए स्थलों का भी दर्शन किया जाए। तो आज के आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।
Dharmik Yatra: वैष्णो देवी
जम्मू की पहाड़ियों में बसे माता वैष्णो देवी धाम की यात्रा वैसे भी कठिन मानी जाती है। हजारों श्रद्धालु हर दिन पैदल चढ़ाई कर माता के दरबार पहुंचते हैं। लेकिन कई लोग एक बड़ी बात भूल जाते हैं। वैष्णो देवी की यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब आप ऊपर भैरवनाथ मंदिर के दर्शन भी कर लें। मान्यता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना माता का आशीर्वाद अधूरा रह जाता है। इसलिए जो भी यात्री कटरा पहुंचता है, वह माता के दर्शन के बाद भैरवनाथ की चढ़ाई जरूर करता है।
Dharmik Yatra: केदारनाथ
केदारनाथ धाम शिव भक्तों के सबसे प्रमुख तीर्थों में आता है। परंपराओं में यह स्पष्ट कहा गया है कि केदारनाथ के दर्शन के साथ नेपाल स्थित पशुपतिनाथ का दर्शन किया जाए, तो यात्रा का फल कई गुना बढ़ जाता है। पुरानी कथा के अनुसार, केदारनाथ को शिव का निचला अंग माना गया है, जबकि नेपाल का पशुपतिनाथ ऊपरी अंग। दोनों मिलकर एक पूर्ण ज्योतिर्लिंग का रूप बनाते हैं। इसलिए सदियों से श्रद्धालु इन दोनों स्थानों को एक ही यात्रा का हिस्सा मानते रहे हैं।
Dharmik Yatra: अमरनाथ गुफा
अमरनाथ गुफा की यात्रा हर भक्त का सपना होती है। बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन मिल जाएं तो जीवन सफल मान लिया जाता है। परंपरा के अनुसार, अमरनाथ के दर्शन से पहले या बाद में शेषनाग और पंचतरणी जैसे पवित्र पड़ावों का भी दर्शन जरूर करना चाहिए। यह दोनों स्थान अमरनाथ मार्ग पर ही आते हैं और इनके बिना यात्रा का आध्यात्मिक महत्व अधूरा माना गया है। कई यात्री तो अमरनाथ के बाद जम्मू के रघुनाथ मंदिर या वैष्णो देवी के दरबार भी मत्था टेकने पहुंचते हैं।
Dharmik Yatra: अयोध्या
रामनगरी अयोध्या में रामलला के दर्शन हर भक्त की इच्छा होती है। अयोध्या की परंपरा के अनुसार, पहले हनुमानगढ़ी जाना चाहिए, फिर रामलला के दर्शन करने चाहिए। मान्यता यह है कि हनुमान जी अयोध्या के रक्षक हैं और बिना उनकी आज्ञा लिए रामलला के दर्शन का फल पूरा नहीं मिलता। इसी वजह से जन्मभूमि मंदिर पहुंचने से पहले श्रद्धालु हनुमानगढ़ी में माथा टेकते हैं।
Dharmik Yatra: खाटू श्याम
राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम धाम में हर दिन भारी भीड़ उमड़ती है। यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा श्याम कुंड में स्नान करना है। मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित यह कुंड वह स्थान माना जाता है, जहां बर्बरीक ने कृष्ण को अपना शीश दान किया था। माना जाता है कि इस पवित्र कुंड का जल स्पर्श करने के बाद ही खाटू श्याम की यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
Note: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। headlinesindianews.com इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।
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