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Uttarakhand कांग्रेस में सुलह के संकेत! हरीश रावत और कुमारी सैलजा की मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल

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Uttarakhand : उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच शनिवार को एक अहम मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के बीच देहरादून में मुलाकात हुई। इस बैठक को पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

इस मुलाकात के सूत्रधार नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य रहे, जो पिछले कुछ समय से पार्टी के दोनों गुटों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी पहल पर ही यह बैठक संभव हो सकी, जिससे पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई।

Uttarakhand कांग्रेस में सुलह के संकेत!

बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हरीश रावत ने इसे सामान्य मुलाकात बताते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश प्रभारी का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई खास बात नहीं रखनी थी, क्योंकि अपनी बात वह पहले ही पार्टी हाईकमान तक पहुंचा चुके हैं। हाल ही में हरीश रावत 15 दिन के अर्जित अवकाश पर चले गए थे, जिससे कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई थी। इस दौरान वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे, लेकिन पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली।

नेताओं की एंट्री से बढ़ा था विवाद

कुछ दिन पहले ही तीन पूर्व विधायकों समेत छह नेताओं को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल किया गया था। इस दौरान रामनगर के नेता संजय नेगी को शामिल न किए जाने से हरीश रावत के नाराज होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी। कुमारी सैलजा के उत्तराखंड दौरे से पहले ही पार्टी के भीतर मतभेद दूर करने की कोशिशें शुरू हो गई थीं। यशपाल आर्य ने खुद हरीश रावत से मुलाकात कर उन्हें सैलजा से मिलने के लिए राजी किया था। शनिवार को देहरादून में कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद सैलजा ने वरिष्ठ नेताओं के साथ भी चर्चा की।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठक

इस अहम बैठक में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अलावा उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, प्रीतम सिंह और डॉ. हरक सिंह रावत जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। सभी ने पार्टी की स्थिति और आगे की रणनीति पर विचार किया। बैठक के बाद सैलजा देर रात दिल्ली रवाना हो गईं। हरीश रावत ने कहा कि उनका अवकाश व्यक्तिगत कारणों से था, लेकिन इस दौरान कई सवाल उठे। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार क्यों मिली। इसका जवाब जानने के लिए वह अब जनता के बीच जाएंगे और पूरे राज्य का दौरा करेंगे।

प्रदेश दौरे का प्लान तैयार

हरीश रावत ने अपने दौरे की रूपरेखा भी साझा की है। वह 15 अप्रैल को उत्तरकाशी के गंगोत्री मार्ग और धराली जाएंगे, जबकि 20 अप्रैल को थराली और कनलगढ़ का दौरा करेंगे। इसके अलावा वह अपने गांव मोहनारी भी जाएंगे और अपने इष्ट देवता के दर्शन करेंगे। इसके बाद हरिद्वार में भी लोगों से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस में सुलह के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन असली फैसला पार्टी हाईकमान के हाथ में है। अब यह देखना होगा कि आगे पार्टी इन मतभेदों को किस तरह सुलझाती है और चुनावी तैयारियों को किस दिशा में ले जाती है।

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