Upcoming IPO : शेयर बाजार में अगले हफ्ते निवेशकों के लिए नए मौके आने वाले हैं। दो कंपनियां अपना आईपीओ लॉन्च करने जा रही हैं, जिससे बाजार में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। इनमें एक मेनबोर्ड कैटेगरी का है, जबकि दूसरा एसएमई सेगमेंट का आईपीओ होगा। ऐसे में निवेशकों की नजर इन दोनों ऑफर्स पर टिकी हुई है। इस बार मेनबोर्ड कैटेगरी में सिटियस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का आईपीओ आएगा, जबकि एसएमई कैटेगरी में मेहुल टेलीकॉम अपना पब्लिक ऑफर लेकर आ रही है। दोनों आईपीओ एक ही दिन खुलेंगे और एक ही दिन बंद भी होंगे, जिससे निवेशकों के पास एक साथ दो विकल्प होंगे।
सिटियस ट्रांसनेट इन्विट का आईपीओ 17 अप्रैल को खुलेगा और 21 अप्रैल तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। इस आईपीओ का कुल साइज करीब 1340 करोड़ रुपये रखा गया है। अभी तक कंपनी ने इसका प्राइस बैंड और लॉट साइज घोषित नहीं किया है, जिससे निवेशकों को अंतिम फैसले के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
Upcoming IPO
ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP की बात करें तो फिलहाल सिटियस ट्रांसनेट इन्विट का GMP शून्य बताया जा रहा है। इसका मतलब है कि अभी बाजार में इस आईपीओ को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा। हालांकि लिस्टिंग के करीब आते-आते इसमें बदलाव संभव है। वहीं, एसएमई कैटेगरी में मेहुल टेलीकॉम का आईपीओ भी 17 अप्रैल को खुलेगा और 21 अप्रैल को बंद होगा। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 96 से 98 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। निवेशकों को इसमें कम से कम 1200 शेयरों का एक लॉट खरीदना होगा।
निवेश का मौका
मेहुल टेलीकॉम के आईपीओ का कुल साइज 27.73 करोड़ रुपये है, जो मेनबोर्ड के मुकाबले काफी छोटा है। आमतौर पर एसएमई आईपीओ में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन इसमें मुनाफे की संभावना भी रहती है, खासकर अगर कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। दिलचस्प बात यह है कि मेहुल टेलीकॉम के आईपीओ का GMP भी फिलहाल जीरो है। इस आईपीओ को लेकर भी ग्रे मार्केट में कोई खास हलचल नहीं दिख रही। निवेशकों को ऐसे में कंपनी के फंडामेंटल्स पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
क्या होता है IPO?
आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफर वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम जनता के लिए जारी करती है। इसके जरिए कंपनी निवेशकों से पैसा जुटाती है और शेयर बाजार में लिस्ट होती है। यह निवेशकों के लिए कंपनी में हिस्सेदारी लेने का मौका होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल और बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है। सिर्फ GMP के आधार पर निवेश करना सही नहीं माना जाता। सही जानकारी और सोच-समझकर किया गया निवेश ही फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
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