Karnataka Political : कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों सत्ता परिवर्तन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधायक दल की अहम बैठक से पहले राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर चर्चा प्रमुख रूप से हो सकती है। यदि सर्वसम्मति बनती है तो उन्हें विधायक दल का नेता चुना जा सकता है।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक बेंगलुरु में आयोजित की जा रही है, जहां नए नेता के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी है।
Karnataka Political
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह जल्द आयोजित किया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि 1 जून को नई सरकार शपथ ले सकती है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की विदाई भी तय मानी जा रही है। नई सरकार के गठन को लेकर जो सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह उपमुख्यमंत्रियों की संख्या है। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि संतुलन साधने के लिए एक साथ चार डिप्टी मुख्यमंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जाएगा। इससे पहले कुछ राज्यों में एक से अधिक उपमुख्यमंत्री बनाए जा चुके हैं।
सिद्धारमैया की भूमिका पर भी नजर
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की। माना जा रहा है कि नए नेतृत्व के चयन में उनकी राय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पार्टी के भीतर उनके प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सरकार गठन और मंत्रिमंडल विस्तार में उनका असर दिखाई दे सकता है।
नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए कई नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट का स्वरूप तय किया जाएगा।
प्रक्रिया के अनुसार होगा फैसला
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने विधायक दल की बैठक को लेकर कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके अनुसार पहले विधायक दल का नेता चुना जाएगा और उसके बाद आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार गठन से जुड़े सभी फैसले पार्टी नेतृत्व और निर्वाचित विधायकों की सहमति से लिए जाएंगे। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ज्योतिषीय भविष्यवाणियां भी सुर्खियों में हैं। डीके शिवकुमार से जुड़े ज्योतिषी ने दावा किया है कि यदि वे मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनका कार्यकाल लंबा हो सकता है। हालांकि राजनीतिक जानकार इसे केवल व्यक्तिगत आकलन मानते हैं और अंतिम फैसला पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी नेतृत्व पर निर्भर बताते हैं।
बदला राजनीतिक परिदृश्य
मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक की राजनीति में लगातार घटनाक्रम बदल रहे हैं। नेताओं की बैठकों, दिल्ली में हुई चर्चाओं और विधायक दल की गतिविधियों ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जहां से कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर तस्वीर साफ हो सकती है। कर्नाटक में होने वाला नेतृत्व परिवर्तन केवल मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसे आगामी चुनावी रणनीति, संगठनात्मक संतुलन और प्रशासनिक प्राथमिकताओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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