UP Ration Card Update : सरकारी राशन की दुकान पर ई-पॉस मशीन में अंगूठा मैच नहीं होने की परेशानी कई लोगों के सामने आती है। खासकर बुजुर्गों और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के फिंगरप्रिंट मशीन कई बार ठीक से नहीं पढ़ पाती। ऐसे में अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। केवल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण फेल होने के आधार पर किसी वास्तविक पात्र लाभार्थी को राशन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्र के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की व्यवस्था के मुताबिक, तकनीकी कारणों से फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने पर लाभार्थी की पहचान के लिए दूसरे उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ई-पॉस मशीन पर अंगूठा नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि राशन कार्ड में कोई गड़बड़ी है या व्यक्ति राशन लेने के योग्य नहीं रहा।
UP Ration Card Update
उत्तर प्रदेश के राशन कार्डधारकों के लिए भी यह जानकारी काफी काम की है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों पर ई-पॉस मशीन के जरिए आधार आधारित प्रमाणीकरण करके खाद्यान्न वितरित किया जाता है। ऐसे में किसी व्यक्ति का फिंगरप्रिंट पहली कोशिश में मैच नहीं होने पर वैकल्पिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के कई कारण हो सकते हैं। उंगलियों के निशान हल्के पड़ जाना, हाथों की त्वचा खराब होना, उम्र बढ़ना या मशीन का फिंगरप्रिंट ठीक से नहीं पढ़ पाना इसकी वजह हो सकती है। इसके अलावा नेटवर्क और कनेक्टिविटी से जुड़ी तकनीकी परेशानी भी प्रमाणीकरण में बाधा बन सकती है। ऐसी स्थिति में फिंगरप्रिंट के अलावा दूसरे बायोमेट्रिक विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आइरिस यानी आंख की पुतली के जरिए प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने की सलाह भी दी गई है। जहां यह सुविधा मौजूद है, वहां फिंगरप्रिंट काम नहीं करने पर आइरिस स्कैन मददगार हो सकता है।
वैकल्पिक पहचान दस्तावेज
आधार OTP या PDS OTP जैसे उपलब्ध विकल्पों से भी पहचान सत्यापित की जा सकती है। मोबाइल पर आने वाले OTP के माध्यम से लाभार्थी की पहचान की पुष्टि का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। कौन सा विकल्प उपलब्ध होगा, यह संबंधित राज्य की राशन वितरण व्यवस्था और दुकान पर मौजूद सुविधा पर निर्भर कर सकता है। तकनीकी समस्या की स्थिति में निर्धारित वैकल्पिक पहचान दस्तावेज भी उपयोगी हो सकते हैं। इनमें वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। हालांकि, संबंधित राज्य में लागू प्रक्रिया और स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची के अनुसार ही इनका इस्तेमाल किया जाएगा।
राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ उठाते हैं। बुजुर्गों के अलावा खेतों, फैक्ट्रियों और निर्माण कार्य में काम करने वाले लोगों के फिंगरप्रिंट कई बार मशीन में आसानी से दर्ज नहीं होते। इसलिए ऐसे लोगों के लिए वैकल्पिक प्रमाणीकरण की जानकारी होना जरूरी है। उत्तर प्रदेश मई 2020 से वन नेशन वन राशन कार्ड व्यवस्था का हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी उपलब्ध कराना है, जिससे पात्र लाभार्थी निर्धारित व्यवस्था के तहत दूसरी जगह रहते हुए भी राशन प्राप्त कर सकें। इसका सबसे ज्यादा फायदा रोजगार के लिए एक राज्य या जिले से दूसरे स्थान पर जाने वाले लोगों को मिलता है।
खाद्यान्न से वंचित न रहे
अगली बार राशन की दुकान पर ई-पॉस मशीन आपका अंगूठा पहचानने में असफल हो जाए तो इसे राशन नहीं मिलने का अंतिम कारण न मानें। दुकान पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रमाणीकरण के बारे में जानकारी ली जा सकती है। सरकारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यही है कि बायोमेट्रिक, नेटवर्क या दूसरी तकनीकी समस्या के कारण कोई वास्तविक पात्र लाभार्थी अपने खाद्यान्न से वंचित न रहे।




