UP Politics : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर अपनी मांग स्पष्ट कर दी है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने सीटों का समझौता अक्टूबर में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद भी जताई है। इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। राजेंद्र पाल गौतम के मुताबिक कांग्रेस के पास प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवार हैं।
पार्टी पूरे राज्य में अपना संगठन मजबूत कर रही है। उनका कहना है कि गठबंधन होने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए भी काम करना होगा, इसलिए सभी क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता जरूरी है।
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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पहले भी सपा के साथ जल्द सीट शेयरिंग तय करने की बात कह चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस कुछ महीने पहले ही 167 विधानसभा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को सौंप चुकी है। मसूद चुनाव में राहुल गांधी की भूमिका पर भी जोर देते रहे हैं। हालांकि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने अभी सीटों की संख्या या चुनावी नेतृत्व को लेकर किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी सीटों की संख्या से पहले उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता पर बातचीत चाहती है।
सपा का रुख है कि कांग्रेस उन निर्वाचन क्षेत्रों और संभावित प्रत्याशियों की जानकारी सामने रखे, जहां उसका संगठन मजबूत है। पार्टी का जोर ऐसे सीट बंटवारे पर है जिसमें स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और उम्मीदवारों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।
अखिलेश की बैठक से दूरी पर भी चर्चा
इसी बीच अखिलेश यादव ने 30 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उनकी जगह सपा का प्रतिनिधि बैठक में हिस्सा लेगा। पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और अन्य व्यस्तताओं को इसकी वजह बताया गया है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को कांग्रेस की सीट शेयरिंग संबंधी मांगों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश ने स्वयं ऐसी नाराजगी की पुष्टि नहीं की है। इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष की आपत्तियों को लेकर चर्चा होनी है।
अखिलेश यादव इन मुद्दों पर पहले भी अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में उनका बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होना चर्चा का विषय है, लेकिन समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिनिधि भेजने का फैसला बताता है कि बैठक में उसकी भागीदारी बनी रहेगी।
अक्टूबर में तय हो सकता है गठबंधन का फॉर्मूला
कांग्रेस सीट बंटवारे का फैसला चुनाव के नजदीक आने तक टालने के पक्ष में नहीं है। पार्टी चाहती है कि उसे मिलने वाली सीटों की संख्या और निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान जल्द स्पष्ट हो, ताकि उम्मीदवारों को तैयारी का समय मिल सके। वहीं सपा सीटों के आवंटन में जीतने की क्षमता को अहम आधार मान रही है। फिलहाल, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने साथ चुनाव लड़ने की बात कही है। हालांकि 150 सीटों की कांग्रेस की मांग पर सपा की औपचारिक सहमति सामने नहीं आई है। अब अक्टूबर में प्रस्तावित बातचीत पर नजर रहेगी, जहां दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व को सीटों की संख्या, निर्वाचन क्षेत्रों और उम्मीदवारों के चयन पर सहमति बनानी होगी।




