UP Govt : उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली समस्याओं और बार-बार ट्रांसफार्मर जलने की घटनाओं को देखते हुए Uttar Pradesh सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब अगर ट्रांसफार्मर जलता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अभियंताओं पर तय की जाएगी। बिजली विभाग के अधिकारियों से मरम्मत में होने वाले खर्च की वसूली भी की जाएगी। इस संबंध में Uttar Pradesh Power Corporation Limited के अध्यक्ष Dr. Ashish Goyal ने सभी बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में अलग-अलग स्तर के अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की गई है।
छोटे क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के खराब होने पर अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता को निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से भुगतान करना होगा। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ाने और लापरवाही को रोकने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे ट्रांसफार्मर की देखभाल और निगरानी में सुधार आएगा।
UP Govt ने तय की नई जवाबदेही
जारी निर्देश के अनुसार, 10 केवीए से 63 केवीए तक के ट्रांसफार्मर जलने पर अवर अभियंता से 50 प्रतिशत, उपखंड अधिकारी से 30 प्रतिशत और अधिशासी अभियंता से 20 प्रतिशत खर्च की वसूली की जाएगी। इस श्रेणी के ट्रांसफार्मर आमतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए इनकी देखरेख में किसी भी तरह की लापरवाही पर अब सीधे आर्थिक जिम्मेदारी तय की जाएगी। 100 केवीए से 250 केवीए तक के ट्रांसफार्मरों के मामले में जिम्मेदारी का बंटवारा अलग तरीके से किया गया है। इस श्रेणी में अवर अभियंता और उपखंड अधिकारी दोनों से 40-40 प्रतिशत खर्च की वसूली की जाएगी, जबकि अधिशासी अभियंता से 20 प्रतिशत की रिकवरी होगी। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से सभी स्तरों के अधिकारी ट्रांसफार्मर की स्थिति पर ज्यादा ध्यान देंगे।
तय की गई जवाबदेही
400 केवीए से 1000 केवीए तक के बड़े ट्रांसफार्मरों के खराब होने की स्थिति में चार स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इस श्रेणी में अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता से 30-30 प्रतिशत की रिकवरी की जाएगी, जबकि अधीक्षण अभियंता से 10 प्रतिशत खर्च लिया जाएगा। यह व्यवस्था बड़े बिजली नेटवर्क की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। इन मामलों में संबंधित अधिकारियों को सक्षम प्राधिकारी की ओर से नियम-10 के तहत नोटिस जारी किया जाएगा।
इसके बाद ही वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभाग ने सभी वितरण कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए सभी जगह फ्यूज सेट और टेललेस यूनिट अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि तकनीकी खराबी और ओवरलोड के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
Read More : UP एयरपोर्ट पर हंगामा, आखिरी वक्त पर रद्द हुई मुंबई फ्लाइट




