Tamil Nadu Bypoll Results : तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी दुनिया से आए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। इस बार मुकाबला विधानसभा की सिर्फ दो सीटों का था, लेकिन विजय ने इसे अपनी सरकार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा। मदुरांतकम और धारापुरम में उन्होंने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाली और मतदाताओं से सीधे संपर्क करने पर जोर दिया। नतीजे आए तो दोनों सीटें उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के खाते में चली गईं। इस जीत से पार्टी को राहत मिली है, हालांकि विपक्ष ने इसे लेकर अलग राजनीतिक सवाल भी उठाए हैं।
अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में विजय की पहचान बड़े चुनावी आयोजनों और डिजिटल प्रचार से जुड़ी रही थी। लेकिन उपचुनाव में उनकी रणनीति कुछ अलग नजर आई। उन्होंने चार दिन तक दोनों विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया।
Tamil Nadu Bypoll Results
इस दौरान रोड शो, जनसभाओं और स्थानीय मतदाताओं से संपर्क के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश की। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में उनकी सक्रियता को TVK की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा गया। मदुरांतकम और धारापुरम की सीटें अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में AIADMK के खाते में गई थीं। मदुरांतकम से के. मरगाथम कुमारवेल और धारापुरम से पी. सत्यभामा विधायक चुनी गई थीं। हालांकि चुनाव के बाद दोनों ने AIADMK से अलग होकर सत्तारूढ़ TVK का दामन थाम लिया। विधायकी से इस्तीफा देने के कारण दोनों सीटें खाली हो गईं। इसके बाद 6 अक्टूबर को मतदान कराया गया और 9 अक्टूबर को मतगणना हुई।
मरगाथम कुमारवेल की जीत
मदुरांतकम विधानसभा सीट पर TVK ने पूर्व विधायक के. मरगाथम कुमारवेल को दोबारा उम्मीदवार बनाया। इस बार उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी AIADMK के बजाय विजय की पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। अंतिम मतगणना के अनुसार, कुमारवेल को 74,048 वोट मिले। उन्होंने DMK उम्मीदवार आई. परंथामन को 20,040 वोटों से हराया। AIADMK की उम्मीदवार कनिथा संपत तीसरे स्थान पर रहीं।
धारापुरम में सत्यभामा ने मारी बाजी
धारापुरम में भी TVK ने पूर्व विधायक पी. सत्यभामा पर भरोसा जताया। मतगणना में उन्हें 66,841 वोट मिले, जबकि DMK की एस. सुगन्या को 57,370 वोट हासिल हुए। इस तरह सत्यभामा ने 9,471 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। AIADMK की के. भानुमति तीसरे स्थान पर रहीं। इस नतीजे के साथ सत्यभामा ने पार्टी बदलने के बाद भी अपनी विधानसभा सीट बरकरार रखी।
CM विजय के लिए महत्वपूर्ण थी जीत
अप्रैल के विधानसभा चुनाव में TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जगह बनाई थी। विजय स्वयं दो सीटों से जीते थे और बाद में एक सीट छोड़ने के कारण पार्टी के निर्वाचित विधायकों की संख्या 107 रह गई थी। सरकार बनाने के लिए उन्हें सहयोगी दलों का समर्थन लेना पड़ा। ऐसे में उपचुनाव की दोनों सीटें जीतना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। दोनों उपचुनाव जीतने के बाद विधानसभा में TVK के विधायकों की संख्या 107 से बढ़कर 109 हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा में पूर्ण बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
इस हिसाब से TVK अभी अपने दम पर बहुमत से नौ सीटें दूर है। हालांकि सहयोगी दलों के समर्थन के कारण विजय सरकार सत्ता में बनी हुई है। उपचुनाव की जीत से पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन सहयोगियों पर उसकी निर्भरता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
मतदाताओं को दिया धन्यवाद
दोनों सीटों पर जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने उम्मीदवारों, पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस सफलता को केवल अपनी व्यक्तिगत जीत मानने के बजाय जनता के समर्थन का परिणाम बताया। विजय ने राजनीतिक विरोधियों की टिप्पणियों और महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक बयानों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, चुनाव परिणामों के जरिए मतदाताओं ने अपना जवाब दिया है। इन नतीजों से विपक्षी दलों के सामने भी नए राजनीतिक सवाल खड़े हुए हैं। दोनों सीटें पहले AIADMK के पास थीं, लेकिन उपचुनाव में उसके उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।
दूसरी ओर DMK दोनों क्षेत्रों में मुख्य मुकाबले में रही, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी। हालांकि DMK नेतृत्व ने TVK की जीत को विजय सरकार के पक्ष में व्यापक जनादेश मानने से इनकार किया है। इस कारण दोनों सीटों के नतीजों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
बढ़ सकती है TVK की ताकत
तमिलनाडु में कुछ अन्य विधानसभा सीटों की स्थिति को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में सदन का संख्या बल बदल सकता है। हालांकि AIADMK के और विधायकों के TVK में शामिल होने की चर्चाओं को फिलहाल पुष्टि के बिना निश्चित राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जा सकता। मदुरांतकम और धारापुरम की जीत ने मुख्यमंत्री विजय को अपनी सरकार के शुरुआती दौर में महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता दिलाई है। लेकिन सिर्फ दो सीटों के परिणामों से पूरे तमिलनाडु के मतदाताओं का रुख तय नहीं किया जा सकता। अब विजय सरकार के सामने चुनावी समर्थन को शासन के प्रदर्शन में बदलने और सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।




