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Success Story: घर छोड़कर रेलवे स्टेशन पर बिताईं रातें, आज 50 हजार करोड़ का मालिक; 90 देशों में फैला कारोबार

Success Story
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Satyanarayan Nuwal Success Story : कहानी की शुरुआत राजस्थान के एक छोटे से गांव से होती है, जहां न तो बड़े सपने देखने की आज़ादी थी और न ही उन्हें पूरा करने के साधन थे। पढ़ाई सिर्फ 10वीं तक 19 साल की उम्र में शादी और परिवार की जिम्मेदारियां सत्यनारायण नुवाल की ज़िंदगी की गाड़ी मुश्किल से चल रही थी। हालात ऐसे बने कि घर छोड़कर रोज़गार की तलाश में निकलना पड़ा। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही युवक आगे चलकर देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में गिना जाएगा। जी हां, सफलता जितनी अधिक दिखती है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही कठिन और कष्टदायी रहा होता है।

रोज़ी-रोटी की तलाश आसान नहीं थी। काम की तलाश में भटकते हुए कई रातें रेलवे स्टेशन पर गुजरीं। जेब में इतने पैसे भी नहीं होते थे कि एक कमरा किराए पर ले सकें। खुद नुवाल बाद में बताते हैं कि यह दौर मानसिक तौर पर बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय हालात को सीख बनने दिया।

Success Story: टर्निंग प्वाइंट

शुरूआत में छोटे-मोटे काम किए। कभी स्याही बेची, कभी ट्रांसपोर्ट का काम किया पर सफलता तुरंत नहीं मिली। 1976-77 के आसपास नुवाल महाराष्ट्र के चंद्रपुर पहुंचे। यहीं उनकी मुलाकात अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई से हुई, जिनके पास विस्फोटक लाइसेंस और डिपो था। नुवाल ने यह डिपो 1,000 रुपए महीने के किराए पर लिया, लेकिन समय पर किराया देना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में अब्दुल सत्तार ने कहा, “तीन महीने में एक बार दे देना।” यही भरोसा आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया।

बढ़ता गया नेटवर्क

डिपो मिलने के बाद धीरे-धीरे कोयला खदानों से ऑर्डर आने लगे। विस्फोटकों का काम समझ में आने लगा और नेटवर्क बढ़ता गया। 1984 तक नुवाल कंसाइनमेंट एजेंट बन चुके थे और 90 के दशक में उनकी पहचान एक बड़े विस्फोटक डीलर के तौर पर होने लगी। यह वही समय था, जब संघर्ष धीरे-धीरे स्थिरता में बदलने लगा। 1995 में नुवाल ने 60 लाख रुपए का बैंक लोन लिया और अपनी खुद की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज की नींव रखी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि दांव बड़ा था और जोखिम भी, लेकिन मेहनत रंग लाई। लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी ने तेजी से रफ्तार पकड़ी। 2006 में जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हुई, तब टर्नओवर करीब 78 करोड़ रुपए था।

पहली निजी कंपनी

2010 तक सोलर इंडस्ट्रीज ने इतिहास रच दिया। यह भारत की पहली निजी कंपनी बनी, जिसे रक्षा सेनाओं के लिए विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला। यहीं से कंपनी ने नई ऊंचाइयों को छूना शुरू किया। आज सोलर इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप करीब 1.13 लाख करोड़ रुपए है और कारोबार 90 से ज्यादा देशों में फैला है। आज 73 साल के सत्यनारायण नुवाल 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं और फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर्स लिस्ट में उनका नाम दर्ज है।

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