Sangeet Som On Akhilesh Yadav : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम (Sangeet Som) और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। संगीत सोम ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते उनकी हत्या कराने की साजिश रची गई थी। उन्होंने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हुई गिरफ्तारी और जेल में बिताए समय का जिक्र करते हुए अपनी जान को खतरा होने का दावा किया। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए पलटवार किया है।
बता दें कि संगीत सोम ने एक पॉडकास्ट में 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े घटनाक्रम को याद किया। उनके मुताबिक, दंगों के दौरान आवाज उठाने के बाद उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
Sangeet Som On Akhilesh Yadav
उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले मुजफ्फरनगर जेल ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटों के भीतर दूसरी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि उन्हें रातभर अलग-अलग जगहों से ले जाते हुए उन्नाव जेल पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि वहां हजारों कैदियों वाली जेल खाली कराकर उन्हें अकेले रखा गया था। उनके अनुसार, कुछ अधिकारियों ने उस समय उनकी जान को खतरा होने की बात कही थी।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों तक संदेश पहुंचाया, जिसके बाद अगले दिन खेड़ा में महापंचायत हुई और बड़ी संख्या में लोग जुटे। संगीत सोम का दावा है कि जनता का समर्थन नहीं मिलता तो उनकी हत्या हो सकती थी। हालांकि, हत्या की साजिश से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
सहानुभूति हासिल करने की कोशिश
संगीत सोम के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाए। सपा नेताओं ने उनके बयान को राजनीतिक रूप से चर्चा में बने रहने की कोशिश बताया। उनका आरोप है कि संगीत सोम जनता के बीच सक्रिय नहीं रहे और अब सहानुभूति हासिल करने के लिए अखिलेश यादव का नाम ले रहे हैं। सपा की ओर से यह भी कहा गया कि टिकट और चुनावी संभावनाओं को लेकर दबाव के बीच इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
मुजफ्फरनगर दंगों में क्या हुआ था?
सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इस दौरान संगीत सोम और सुरेश राणा समेत कई नेताओं के नाम भी सामने आए थे। नगला मंदौड़ में हुई महापंचायत के दौरान कथित भड़काऊ भाषण और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से जुड़े आरोपों के बाद तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में संगीत सोम और सुरेश राणा को गिरफ्तार किया गया था।
मार्च 2021 में विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने संगीत सोम, सुरेश राणा और साध्वी प्राची समेत अन्य लोगों से जुड़े मामलों में अभियोजन वापसी की अनुमति दी थी। वहीं, नगला मंदौड़ महापंचायत से जुड़े एक अन्य मामले में अगस्त 2026 में 22 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अर्जी स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अतुल प्रधान से हारे थे संगीत सोम
संगीत सोम सरधना विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2017 में जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान से हार गए थे। अब 2027 के चुनाव से पहले उनके हालिया बयान को राजनीतिक गतिविधियों और संभावित टिकट की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल, हत्या की साजिश के आरोपों पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी जारी है।
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