UP Weather News : उत्तर प्रदेश में पिछले 10 दिनों से जारी मानसूनी बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनने लगी है। लगातार हो रही बारिश से प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि नोएडा में हिंडन नदी भी चेतावनी स्तर पार कर चुकी है। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.59 मीटर को पार कर 154.72 मीटर तक पहुंच गया। नदी का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है। हालात ऐसे हैं कि खेतों और सड़कों पर मगरमच्छ दिखाई देने लगे हैं।
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वहीं, कानपुर देहात के अमराहट गांव में करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ नहर में दिखाई दिया, जिसे वन विभाग की टीम ने सुरक्षित पकड़कर यमुना नदी में छोड़ दिया। लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के कारण वाराणसी में गंगा का जलस्तर एक सप्ताह में करीब 10 फीट बढ़ गया है। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक लगभग 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। प्रयागराज में भी कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। सोनभद्र में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से जिला जेल तक जाने वाली सड़क बह गई है।
बढ़ा बाढ़ का खतरा
कर्तनियाघाट और गिरिजा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अयोध्या, गोंडा और बस्ती के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछले 24 घंटों में सरयू नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर 92 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है। बुधवार सुबह से नोएडा में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि लखनऊ, कानपुर, आगरा, बरेली समेत करीब 50 शहरों में बादल छाए रहे। कई स्थानों पर धूप और बादलों का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के अनुसार आगरा में 25 जुलाई तक इसी तरह का मौसम बना रहेगा। बरेली में तेज धूप के बावजूद दिन में बारिश की संभावना जताई गई है।
फिर सक्रिय होगा मानसून
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर क्षेत्र के कमजोर होने के बाद अब मानसूनी रेखा दक्षिण की ओर खिसक रही है। इसके चलते बुधवार को कुछ जिलों में भारी और दक्षिणी क्षेत्रों में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। 23 से 25 जुलाई के बीच बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून एक बार फिर सक्रिय होकर प्रदेश में व्यापक वर्षा करा सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा ने बताया कि प्रशांत महासागर में अल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, उत्तरी गोलार्ध में इस वर्ष कम बर्फबारी भी दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पूरे सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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