Property Buying Tips : घर, फ्लैट या प्लॉट खरीदना अधिकांश लोगों के जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या अधूरी जानकारी के कारण फर्जी रजिस्ट्री, विवादित जमीन या एक ही संपत्ति को कई खरीदारों को बेचने जैसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में न केवल लाखों रुपये फंस सकते हैं, बल्कि वर्षों तक कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ सकती है। राहत की बात यह है कि अब उत्तर प्रदेश में कई जरूरी रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से घर बैठे कुछ मिनटों में संपत्ति की प्राथमिक जांच की जा सकती है।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सबसे पहले मूल बैनामा (सेल डीड) देखें। इससे यह पता चलता है कि मौजूदा मालिक ने संपत्ति कब और किससे खरीदी थी। इसके साथ ही होल्डिंग टैक्स की रसीद भी जांचें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टैक्स नियमित रूप से जमा हो रहा है और रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज है।
Property Buying Tips
सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज खारिज-दाखिल (म्यूटेशन) है। केवल रजिस्ट्री होना पर्याप्त नहीं होता। सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति का नामांतरण होना भी जरूरी है। यदि रजिस्ट्री के बाद 90 दिनों के भीतर म्यूटेशन नहीं हुआ है, तो भविष्य में विवाद की आशंका बढ़ सकती है। साथ ही भारमुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) भी जरूर देखें, जिससे पता चलता है कि संपत्ति पर किसी बैंक का लोन, बंधक या कानूनी विवाद तो नहीं है।
ऐसे जांचें रजिस्ट्री
रजिस्ट्री की सत्यता जांचने के लिए उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग की वेबसाइट igrsup.gov.in पर जाकर ‘संपत्ति खोजें’ विकल्प में रजिस्ट्री नंबर और रजिस्ट्रेशन वर्ष दर्ज किया जा सकता है। इससे पता चल जाएगा कि संबंधित रजिस्ट्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। यदि संपत्ति पहले कई बार खरीदी और बेची गई है, तो सभी पुरानी रजिस्ट्रियों का क्रम भी जांचना चाहिए। रिकॉर्ड में कोई कड़ी गायब हो या जानकारी मेल न खाए, तो सौदा करने से पहले पूरी कानूनी जांच कराना बेहतर होता है। रजिस्ट्री में दर्ज गवाहों की स्थानीय स्तर पर पुष्टि करना भी जरूरी माना जाता है।
ऐसे करें पता
संपत्ति पर बैंक का कर्ज या अदालत में मुकदमा चल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। upbhulekh.gov.in पोर्टल पर जाकर खतौनी में ‘डिटेल’ या ‘कमेंट’ कॉलम देखें। यदि जमीन बैंक में गिरवी है या उस पर कोर्ट का स्थगन आदेश है, तो उसकी जानकारी वहीं दर्ज रहती है। इसके अलावा, संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में गाटा संख्या के आधार पर इंडेक्स सर्च कराकर यह भी पता लगाया जा सकता है कि संपत्ति की पहले कितनी बार रजिस्ट्री हुई है और उस पर कोई कानूनी दावा या बैंक लोन तो नहीं है।
नोटिस देना समझदारी
यदि आप बड़ी कीमत की जमीन या मकान खरीद रहे हैं, तो किसी अनुभवी वकील की मदद से एक हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराना लाभदायक होता है। इसमें संभावित खरीद की जानकारी देकर 15 दिनों के भीतर किसी भी दावेदार या आपत्ति रखने वाले व्यक्ति से प्रमाण सहित संपर्क करने को कहा जाता है। इससे भविष्य में विवाद होने पर यह साबित करना आसान होता है कि खरीदार ने पूरी सावधानी बरती थी।
इन गलतियों से बचें
प्रॉपर्टी खरीदते समय पूरा भुगतान नकद में करने से बचें और बैंकिंग माध्यमों से ही लेनदेन करें। पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर बिक्री होने पर वास्तविक मालिक से पुष्टि अवश्य करें। फ्लैट खरीदते समय कारपेट एरिया के आधार पर कीमत समझें, सर्किल रेट से कम मूल्य पर रजिस्ट्री कराने से बचें और जमीन का लैंड यूज जरूर जांच लें।
यदि बिल्डर से संपत्ति खरीद रहे हैं, तो फायर, प्रदूषण नियंत्रण, बिजली विभाग और विकास प्राधिकरण की सभी आवश्यक एनओसी देख लें। वहीं, ‘एग्रीमेंट टू सेल’ को अंतिम मालिकाना हक न मानें। संपत्ति का कानूनी स्वामित्व केवल रजिस्ट्री और नामांतरण के बाद ही मिलता है। पैतृक या वसीयत वाली जमीन खरीदने से पहले सभी कानूनी वारिसों और बंटवारे की स्थिति की भी पूरी जांच अवश्य कर लें।
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