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Oxygen से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक, एक पादरी की खोज ने बदल दी दुनिया

Joseph Priestley
Source: Dainik Jagran

Oxygen : अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन हो या गर्मी में राहत देने वाली कोल्ड ड्रिंक इन दोनों के पीछे एक ही शख्स का नाम जुड़ा है, वह Joseph Priestley हैं। खास बात यह है कि वह पेशे से वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एक पादरी और दार्शनिक थे, जिन्होंने अपने जुनून से दुनिया को नई दिशा दी। जोसेफ प्रिस्टली बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। उन्होंने कम उम्र में ही लैटिन, ग्रीक और हिब्रू जैसी कई भाषाएं सीख ली थीं। उन्होंने Daventry Academy से धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और बाद में पादरी बन गए लेकिन विज्ञान के प्रति उनकी रुचि तब बढ़ी, जब उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक Benjamin Franklin के प्रयोगों के बारे में पढ़ा।

1 अगस्त 1774 का दिन विज्ञान के इतिहास में खास माना जाता है। इसी दिन प्रिस्टली ने एक खास प्रयोग के दौरान ऑक्सीजन गैस की खोज की। उन्होंने सूरज की किरणों को एक बर्निंग लेंस से ‘मर्क्युरिक ऑक्साइड’ पर फोकस किया।

Oxygen से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक

इससे एक नई गैस निकली, जो न रंग की थी और न ही उसकी कोई गंध थी। जब उन्होंने इस गैस के पास जलती हुई मोमबत्ती रखी, तो उसकी लौ और तेज हो गई। प्रिस्टली ने इस गैस के असर को समझने के लिए एक और प्रयोग किया। उन्होंने एक कांच के जार में चूहे को इस गैस के साथ रखा। उन्होंने देखा कि चूहा सामान्य हवा के मुकाबले इसमें ज्यादा देर तक जिंदा रहा और ज्यादा सक्रिय भी था। उन्होंने इस गैस को ‘डीफ्लोगिस्टिकेटेड एयर’ नाम दिया, जिसे आज हम ऑक्सीजन के नाम से जानते हैं।

कई गैसों की भी पहचान

ऑक्सीजन के अलावा प्रिस्टली ने कई और गैसों की पहचान की। इनमें नाइट्रस ऑक्साइड (लाफिंग गैस), अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड शामिल हैं। उनके इन प्रयोगों ने विज्ञान की दुनिया में नई संभावनाएं खोलीं और आगे के शोध का रास्ता आसान बनाया। बहुत कम लोग जानते हैं कि आज जो सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा हम पीते हैं, उसकी शुरुआत भी प्रिस्टली ने ही की थी। 1767 में उन्होंने एक प्रयोग के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस को पानी में घोलकर पहला आर्टिफिशियल सोडा वॉटर तैयार किया। यह स्वाद में ताजा और अलग था, जिसने आगे चलकर पूरी दुनिया में कोल्ड ड्रिंक इंडस्ट्री की नींव रखी।

मिला बड़ा सम्मान

अपनी इन अहम खोजों के लिए प्रिस्टली को दुनिया भर में पहचान मिली। Royal Society ने उन्हें 1772 में अपने सबसे बड़े सम्मान ‘कोपले मेडल’ से नवाजा। उनकी कहानी यह बताती है कि अगर किसी में सीखने की लगन हो, तो वह किसी भी क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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