UP Traditional Food : उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों की पहचान केवल उनके ऐतिहासिक स्थलों और संस्कृति से नहीं, बल्कि वहां के खान-पान से भी होती है। बनारस की मलाईयो, आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और लखनऊ की चाट जैसे व्यंजनों का स्वाद लोगों को दूर-दूर से अपनी ओर खींचता है। अब इन पारंपरिक व्यंजनों को स्थानीय बाजारों से निकालकर विदेशों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन (ODOC) पहल के जरिए खाद्य कारोबार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
बता दें कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन पहल को प्रमुखता दी गई। इसका उद्देश्य प्रदेश के 75 जिलों के खास व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रेड शो में 90 देशों से 600 से अधिक खरीदार पहुंचे।
UP Traditional Food
इस आयोजन के जरिए स्थानीय कारोबारियों को विदेशी खरीदारों के सामने अपने उत्पाद पेश करने का अवसर मिला। प्रदेश सरकार पहले से वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। इसी सोच को अब खान-पान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ODOC के तहत हलवाइयों, छोटे खाद्य उद्यमियों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को नए कारोबारी अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे पारंपरिक व्यंजनों की पहचान के साथ स्थानीय रोजगार बढ़ने की संभावना भी है।
विदेशी बाजारों में बढ़ सकती है मांग
दुनिया के कई देशों में भारतीय भोजन और पारंपरिक खाद्य उत्पादों की मांग बनी हुई है। खाड़ी देशों, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी ऐसे उत्पादों के संभावित ग्राहक हैं। हालांकि, विदेशी बाजारों में जगह बनाने के लिए केवल स्वाद काफी नहीं होगा। उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षित पैकेजिंग और समय पर आपूर्ति भी जरूरी होगी। पारंपरिक मिठाइयों के निर्यात में सबसे बड़ी चुनौती उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
इसी को ध्यान में रखते हुए बेहतर पैकेजिंग और शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाली तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है। खाद्य उत्पादों के लिए FSSAI और संबंधित विदेशी बाजारों के सुरक्षा मानकों का पालन भी महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा जरूरत के अनुसार HACCP, ISO और अन्य प्रमाणन कारोबारियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
डिजिटल ब्रांडिंग से मिलेगी पहचान
स्थानीय व्यंजनों को बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए डिजिटल मार्केटिंग की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। क्यूआर कोड आधारित पैकेजिंग के जरिए ग्राहकों को उत्पाद की सामग्री, निर्माण स्थल और अन्य जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे खरीदारों के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। छोटे कारोबारियों के लिए ऑनलाइन बिक्री के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। खाद्य उत्पादों को दूर के बाजारों तक पहुंचाने में परिवहन व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ी माल ढुलाई सुविधाएं भविष्य में इस कारोबार के लिए उपयोगी हो सकती हैं। खासकर जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए कोल्ड चेन और तेज परिवहन व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा।
कारोबारियों को मिल सकता है फायदा
ODOC पहल से केवल मिठाई बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादकों, किसानों, पैकेजिंग कारोबारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए छोटे उद्यमियों तक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और जरूरी तकनीक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। नियमित गुणवत्ता बनाए रखना और लगातार ऑर्डर पूरे करना भी बड़ी चुनौती रहेगी। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन पहले से पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। अगर इनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती है, तो संबंधित शहरों के प्रति पर्यटकों की दिलचस्पी भी बढ़ सकती है।
फिलहाल, वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन पहल के सामने स्थानीय स्वाद को सुरक्षित रखते हुए उसे बड़े बाजार के अनुरूप तैयार करने की चुनौती है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छोटे कारोबारियों को कितने स्थायी कारोबारी अवसर मिलते हैं।




