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OLA की बैटरी गारंटी पर बड़ा विवाद, सर्विस सेंटर पर मनमानी का आरोप; शटर बंद कर भागा मालिक

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OLA : ओला इलेक्ट्रिक जिस पर लोग भरोसा करके इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीद रहे हैं, अब उसी भरोसे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी की 8 साल की बैटरी गारंटी के बड़े-बड़े दावे जमीन पर कितने सच हैं, इसकी एक तस्वीर सामने आई है। यहां एक ग्राहक का आरोप है कि स्कूटी खरीदे अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ और ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर ने बैटरी खराब बताकर सीधे 60 हजार रुपये की मांग कर दी। जिसको लेकर ग्राहकों में काफी अधिक रोष है। सभी ने कंपनी पर नाराजगी जताई है। धीरे-धीरे मुद्दा गहराता नजर आ रहा है।

ग्राहक का कहना है कि उसने स्कूटी इसलिए ली थी क्योंकि पेट्रोल का खर्च बचेगा, प्रदूषण कम होगा और कंपनी 8 साल की बैटरी गारंटी दे रही थी। स्कूटी करीब 4 से 4.5 हजार किलोमीटर ही चली है। अचानक स्कूटी ने चलना बंद कर दिया। जब वह सर्विस सेंटर पहुंचा, तो बिना ठीक से जांच किए ही स्टाफ ने कह दिया कि बैटरी खत्म हो गई है।

OLA: गारंटी के बावजूद मांगे जा रहे पैसे

ऐसे में ग्राहक नवीन चौहान ने सवाल उठाया कि अगर 8 साल की गारंटी है तो फिर पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं। जवाब में कहा गया कि बैटरी बदलवानी है, तो 60 हजार रुपये देने होंगे। यही नहीं, आरोप है कि बात बढ़ते ही सर्विस सेंटर का स्टाफ शटर गिराकर वहां से भाग गए। मीडिया के सामने भी कर्मचारी जवाब देने से बचते नजर आए। जिसकी बहुत सारी तस्वीरें और वीडियोज सामने आई है। ग्राहक का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों से वह लगातार कॉल कर रहा है, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा। स्कूटी चार्ज हो रही है, लाइटें जल रही हैं, लेकिन चल नहीं रही। इसके बावजूद कोई टेक्निकल जांच तक नहीं की गई। सिर्फ ऐप देखकर फैसला सुना दिया गया कि बैटरी खत्म है।

हमेशा बनाया जाता है बहाना

बता दें कि यह मामला सिर्फ एक ग्राहक तक सीमित नहीं बताया जा रहा। कई ऐसे लोग हैं जो किस्तों पर स्कूटी खरीद रहे हैं, जिनके लिए इस तरह की परेशानी बहुत बड़ी हो सकती है। अगर एक साल के अंदर ही इतनी बड़ी रकम मांगी जाएगी, तो आम आदमी क्या करेगा? जो लोग मामूली नौकरी करते हैं, उनके लिए 60 हजार रुपये देना आसान नहीं है। एक ग्राहक का कहना है कि 6 महीने में वह करीब 25 बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगा चुका है। हर बार कोई न कोई बहाना बना दिया जाता है। कभी मैनेजर नहीं मिलता, कभी स्टाफ बात करने से बचता है।

उठ रहे ये सवाल!

लोग अब यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या बैटरी के नाम पर कोई बड़ा खेल चल रहा है। अगर सब कुछ ठीक है तो सर्विस सेंटर जवाब क्यों नहीं देता? 1 से 1.5 लाख की स्कूटी अगर सिर्फ एक साल में जवाब दे दे और उसकी बैटरी आधी कीमत की बताई जाए, तो भरोसा कैसे बनेगा? एकत्रित ग्राहकों में एक ने साफ कहा कि अगर समाधान नहीं मिला, तो वह कंज्यूमर कोर्ट जाने को मजबूर होगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने की बात तो हर जगह हो रही है, लेकिन अगर जमीनी हकीकत ऐसी रही तो लोग दोबारा सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।

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