New Year 2026 : महादेव शिव केवल संहार के देव नहीं, बल्कि जीवन को संतुलन और स्थिरता देने वाले देवता माने जाते हैं। भोलेनाथ को आशुतोष कहा जाता है, क्योंकि वे सच्ची भक्ति से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव भस्म, रुद्राक्ष और जल जैसे साधारण तत्वों से पूजे जाते हैं, लेकिन उनकी साधना का प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। मान्यता है कि जहां शिव का वास होता है, वहां नकारात्मक शक्तियां टिक नहीं पातीं। इसलिए घर में शिवलिंग की स्थापना को जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में चल रहे मानसिक और पारिवारिक तनाव कम होते हैं। कहा जाता है कि जल, दूध या बेलपत्र से किया गया अभिषेक घर के वातावरण को शांत करता है। साथ ही परिवार पर महादेव की कृपा बनी रहती है।
New Year: शिवलिंग स्थापना का महत्व
ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में नए साल के दिन घर में शिवलिंग स्थापित करना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विशेष विधि से पूजा करने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां कम होती हैं और धन-संबंधी अड़चनें दूर होती हैं। साथ ही घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना सर्वोत्तम माना गया है। यह दिशा ईशान कोण कहलाती है, जिसे देवताओं की दिशा माना जाता है। इस दिशा में शिवलिंग रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और अधूरे कार्य पूरे होने लगते हैं। ध्यान रखें कि शिवलिंग की जलाधारी का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।
वास्तु के जानकारों के अनुसार, घर में एक से अधिक शिवलिंग स्थापित नहीं करने चाहिए। कई शिवलिंग रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए गृहस्थ जीवन में एक शिवलिंग को ही पर्याप्त और शुभ माना गया है।
न करें अनदेखी
- शिवलिंग को कभी भी गंदे हाथों से स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- अभिषेक के लिए चांदी, पीतल या मिट्टी के पात्र का उपयोग करना शुभ माना गया है।
- पूजा करते समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए और काले रंग के कपड़ों से परहेज करना चाहिए।
- साथ ही मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना रखना भी वर्जित माना गया है।
वास्तु शास्त्र में माना गया है कि देवी-देवताओं की प्रतिमा या प्रतीक सही दिशा में स्थापित हों तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। शिवलिंग की स्थापना भी इसी नियम के अंतर्गत आती है। यदि दिशा, विधि और भावना तीनों सही हों, तो महादेव की कृपा लंबे समय तक बनी रहती है। घर में सुख-शांति का वास होता है।
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