MP News : उज्जैन-इंदौर मार्ग पर सिक्सलेन निर्माण को विकास की बड़ी तस्वीर के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इसी तस्वीर के पीछे मजदूरों की जान की कीमत चुकाई जा रही है। शनिवार को होटल शांति पैलेस तिराहा स्थित फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर एक दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय मजदूर की मौत हो गई। यह हादसा किसी अचानक आई आपदा का नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर बरती जा रही लगातार लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। फ्लाईओवर के पिलर स्ट्रक्चर पर सरिया बांधने का काम ऊंचाई पर चल रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मजदूर अशोक, निवासी ग्राम कटांग, लातेहार (झारखंड), बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहा था। काम के दौरान संतुलन बिगड़ते ही भारी सरियों का जाल उसके ऊपर आ गिरा और वह उसमें बुरी तरह फंस गया।
MP News: रेस्क्यू में लगा वक्त
हादसे के बाद मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने अशोक को निकालने की कोशिश की, लेकिन भारी स्ट्रक्चर के कारण तत्काल मदद संभव नहीं हो सकी। सूचना मिलते ही ठेकेदार एजेंसी पीएस इंफ्राकान के प्रतिनिधि, पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सेफ्टी सिस्टम बेनकाब
घटनास्थल पर न सेफ्टी नेट नजर आई, न लाइफ लाइन और न ही ऊंचाई पर काम के लिए जरूरी बैरिकेडिंग। सुपरविजन का अभाव साफ दिखाई दिया। सवाल यह उठता है कि जब हजारों करोड़ की परियोजना पर काम हो रहा है, तो मजदूरों की बुनियादी सुरक्षा को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब सिक्सलेन परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई हो। इससे पहले भी मीडिया में कई बार यह मुद्दा उठाया गया कि मजदूरों से बिना सेफ्टी किट काम कराया जा रहा है। बावजूद इसके न ठेकेदार एजेंसी ने कोई ठोस कदम उठाया और न ही जिम्मेदार विभागों ने सख्ती दिखाई।
46 प्रतिशत हिस्सा पूरा
उज्जैन-इंदौर मार्ग को फोरलेन से सिक्सलेन में बदलने की यह परियोजना मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की है। इसकी कुल लंबाई 46.475 किलोमीटर है और लागत करीब 1692 करोड़ रुपये बताई गई है। जनवरी 2025 में शुरू हुए इस काम का अब तक लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है।
परियोजना को जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 2 बड़े पुल, 8 फ्लाईओवर, 6 अंडरपास और 70 से ज्यादा कलवर्ट बनाए जा रहे हैं। शांति पैलेस तिराहा फ्लाईओवर इसी योजना का अहम हिस्सा है, जहां हुई यह मौत विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना यह है कि हादसे के बाद सिर्फ जांच होगी या मजदूरों की सुरक्षा को सच में प्राथमिकता मिलेगी।
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