Lucknow News : लखनऊ में मोहर्रम के महीने के दौरान मातम, मजलिस और जुलूसों का सिलसिला लगातार जारी है। पांचवें दिन की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ में आग पर मातम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से पहले मौलाना फरीदुल हसन ने मजलिस को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने इमाम हुसैन की जीवनी से प्रेरणा लेने और उनके आदर्शों पर चलने की बात कही। कदीमी मासूमिया असगरिया संगठन की ओर से आयोजित इस मातम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
संगठन के अध्यक्ष सुहैल ने बताया कि यह परंपरा पिछले 45 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। मजलिस के बाद हुसैनी दस्ते ने हाथों में अलम लेकर “या हुसैन” के नारों के बीच दहकते अंगारों पर चलकर मातम किया। इस दौरान लगभग चार घंटे तक कई क्विंटल लकड़ियों को जलाकर आग तैयार की गई।
Lucknow में मोहर्रम
आयोजन के दौरान करीब 25 लोगों ने आग पर चलकर मातम किया। श्रद्धालु “या हुसैन” के नारों के साथ जलते अंगारों पर गुजरे। यह पूरा आयोजन कर्बला की घटना की याद में किया जाता है, जिसमें इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। मौलाना फरीदुल हसन ने अपने संबोधन में कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों पर अत्याचार किए गए थे। उन्होंने बताया कि शहादत के बाद उनके खेमों में आग लगा दी गई थी और परिवार के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आज भी आग पर मातम की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी शामिल होते हैं।
सालों से जुड़ी आस्था और परंपरा
कार्यक्रम में शामिल नकी नाम के एक श्रद्धालु ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से लगातार आग पर मातम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में निभाई जाती है, जहां इमाम हुसैन के अनुयायी मौजूद हैं। लखनऊ में यह आयोजन पिछले चार दशकों से अधिक समय से धार्मिक आस्था और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बना हुआ है।
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