Mobile SMS Alert : देश में आपदा के समय तेज और भरोसेमंद सूचना पहुंचाने के लिए नया इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में National Disaster Management Authority (NDMA) ने 2 मई को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम की टेस्टिंग की। इस दौरान कई मोबाइल यूजर्स को अचानक अलर्ट मैसेज और तेज बीप की आवाज सुनाई दी।
सरकार ने साफ किया है कि अगर आने वाले दिनों में मोबाइल पर इसी तरह के अलर्ट दिखाई दें या तेज आवाज आए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह से एक टेस्टिंग प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सिस्टम की कार्यक्षमता जांचना है।
Mobile SMS Alert
यह प्रोजेक्ट Department of Telecommunications (DoT) और NDMA मिलकर चला रहे हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके और नुकसान को कम किया जा सके। यह नया अलर्ट सिस्टम ‘SACHET’ नामक प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा हुआ है, जिसे Centre for Development of Telematics (C-DOT) ने विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम
सामान्य SMS से अलग, सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक एक तय क्षेत्र के सभी मोबाइल फोन्स पर एक साथ संदेश भेजती है। इससे नेटवर्क पर दबाव नहीं पड़ता और अलर्ट तेजी से ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। खासकर आपदा के समय, जब नेटवर्क जाम हो जाते हैं, तब यह सिस्टम अधिक प्रभावी साबित होता है। इस तकनीक को मौजूदा SMS सिस्टम के साथ जोड़ा गया है ताकि सुनामी, भूकंप, बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ गैस लीक या केमिकल हादसों जैसी स्थितियों में भी समय पर चेतावनी दी जा सके। इससे लोगों को पहले से सतर्क रहने का मौका मिलेगा।
एक से ज्यादा बार मिल सकते हैं अलर्ट
अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क्स और टावरों की जांच के कारण यूजर्स को एक से ज्यादा बार अलर्ट मिल सकते हैं। यह पूरी तरह सामान्य है और टेस्टिंग प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मैसेज पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं होती। यह अलर्ट उन्हीं मोबाइल फोन्स पर आएंगे, जिनमें ‘सेल ब्रॉडकास्ट टेस्ट अलर्ट’ फीचर चालू है। यूजर्स चाहें तो अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर इस विकल्प को ऑन या ऑफ कर सकते हैं।
लॉन्च के बाद ऐसे करेगा काम
जब यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाएगा, तब किसी भी आपदा के दौरान प्रभावित इलाके के लोगों को कुछ ही सेकंड में चेतावनी मिल जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और आपदा प्रबंधन और अधिक प्रभावी होगा।
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