Man Ki Baat : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने रेडियो कार्यक्रम Mann Ki Baat के हालिया संस्करण में भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम का जिक्र करते हुए देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता के संकल्प को रेखांकित किया। इस विषय को लेकर राजनीतिक और वैज्ञानिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम में विशेष रूप से तमिलनाडु के Kalpakkam स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल करने को बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उपलब्धि भारत की परमाणु तकनीक में बढ़ती दक्षता और शोध क्षमता का स्पष्ट संकेत है। इससे देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिल सकती है।
Man Ki Baat
सरकार के अनुसार, सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कई अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को इससे बल मिलने की बात कही जा रही है। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का उपयोग चिकित्सा, खाद्य संरक्षण और अनुसंधान में भी तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का यह कार्यक्रम लंबे समय की रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी द्वारा आज @mannkibaat कार्यक्रम में भारत के Civil Nuclear Programme जैसे महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख, देश के वैज्ञानिक सामर्थ्य, अनुसंधान उत्कृष्टता एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई प्रेरणा देने वाला है, आपका हार्दिक आभार प्रधानमंत्री… pic.twitter.com/anytUfjiOg
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 26, 2026
इस दिशा में देश ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार प्रगति की है। न्यूक्लियर ऊर्जा को स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, जो बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बढ़ी जागरूकता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाने से वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता बढ़ती है और युवाओं को शोध व तकनीक के क्षेत्र में आगे आने की प्रेरणा मिलती है। सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सरकार का जोर यह संकेत देता है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं। इसे देश के विकास और आत्मनिर्भरता के बड़े लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
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