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Kerala Election से पहले कांग्रेस में हलचल, शशि थरूर की नाराजगी से बढ़ी सियासी गर्मी

Kerala Election
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Kerala Election : केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद रह चुके शशि थरूर की नाराजगी अब खुलकर सामने आती दिख रही है। चुनावी रणनीति पर चर्चा के लिए बुलाई गई अहम बैठक से उनकी दूरी ने राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस आलाकमान ने आज दिल्ली में केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें आगामी चुनावों की रूपरेखा तय की जानी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, शशि थरूर इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल केरल में ही मौजूद हैं और पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाए हुए हैं।

शशि थरूर की नाराजगी की जड़ राहुल गांधी की हालिया कोच्चि यात्रा से जुड़ी मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बड़े कार्यक्रम के दौरान उन्हें राहुल गांधी के मंच पर पहुंचने से पहले अपना भाषण समाप्त करने को कहा गया था। थरूर ने इस घटना को अपने सम्मान से जुड़ा मुद्दा मानते हुए इसे अपमानजनक बताया है।

Kerala Election से पहले कांग्रेस में हलचल

सूत्रों का कहना है कि शशि थरूर को लगता है कि पार्टी के भीतर उनके कद और योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं दिया जा रहा। इसी भावना के चलते उन्होंने पार्टी की बैठक से खुद को अलग रखने का फैसला किया है। हालांकि, इस पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अंदरूनी असंतोष की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न ही पार्टी नेतृत्व ने शशि थरूर की बैठक से गैरहाजिरी को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। इस चुप्पी के चलते राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर कयास लगा रहे हैं।

कांग्रेस के लिए अहम हैं ये संकेत

केरल में कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख चेहरे की नाराजगी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है। शशि थरूर का राज्य में अच्छा जनाधार है और उनकी भूमिका को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह मामला सिर्फ एक असंतोष तक सीमित रहता है या कांग्रेस की केरल रणनीति पर गहरा असर डालता है।

फिलहाल, कांग्रेस के भीतर यह घटनाक्रम केरल की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच यह दूरी कब और कैसे कम होगी और इसका चुनावी समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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