UP Assembly : उत्तर प्रदेश विधानमंडल के आगामी सत्र में संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। सरकार ने 3 से 6 अगस्त तक विधानसभा और विधान परिषद का इस वर्ष का तीसरा सत्र बुलाने का फैसला किया है। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक और अन्य विधायी कार्यों के साथ वर्ष 2024 में संभल में हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट भी सदन के सामने प्रस्तुत की जाएगी। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-174 और उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के अनुसार दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। इसी संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए अगस्त में नया सत्र आयोजित किया जा रहा है।
UP विधानसभा
संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने बीते वर्ष 28 अगस्त को अपनी करीब 450 पन्नों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी। सरकार अब इसी रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखेगी। रिपोर्ट में संभल की जनसांख्यिकीय स्थिति, पिछले कई दशकों में हुई घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही नगर की आबादी में आए बदलाव और उसके कारणों को लेकर भी आयोग ने अपने निष्कर्ष दर्ज किए हैं।
गंभीर पहलुओं का उल्लेख
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी लगभग 45 प्रतिशत थी, जो समय के साथ घटकर करीब 15 प्रतिशत रह गई। आयोग ने इस बदलाव के पीछे हिंसा, पलायन, सांप्रदायिक तनाव, कथित लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे कारणों का उल्लेख किया है। इसके अलावा रिपोर्ट में पिछले सात दशकों के दौरान हुए 15 दंगों, 68 धार्मिक स्थलों और 19 पावन कूपों पर कथित कब्जे, हरिहर मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ तथा विभिन्न सामाजिक और सांप्रदायिक विवादों का भी जिक्र किया गया है।
अवैध कारोबार का भी जिक्र
जांच रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अन्य बिंदुओं को भी शामिल किया गया है। इसमें कुछ आतंकी संगठनों की कथित गतिविधियों, अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित किए जा चुके आसिम उर्फ सना-उल-हक के संदर्भ तथा क्षेत्र में अवैध हथियारों और मादक पदार्थों के कारोबार के बढ़ने जैसी बातों का उल्लेख किया गया है। सरकार की ओर से अब इस रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने के बाद इस पर राजनीतिक और विधायी स्तर पर चर्चा होने की संभावना है।
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