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Hormuz में ईरान का सेफ कॉरिडोर प्लान, तनाव के बीच चुनिंदा जहाजों को सुरक्षित रास्ता; भारत के निकले 3 टैंकर

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Hormuz : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक विशेष “सेफ कॉरिडोर” तैयार किया है। इस रास्ते का उद्देश्य मित्र देशों के जहाजों को अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना बताया जा रहा है। यह समुद्री गलियारा ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है और इसका संचालन कड़ी निगरानी के साथ किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार केवल उन्हीं जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति है जिन्हें पहले से ईरानी प्रशासन की स्वीकृति मिल चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, यह गलियारा ईरान के लारक द्वीप के आसपास से होकर गुजरता है। समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियों का कहना है कि इस कॉरिडोर के जरिए जहाजों को होर्मुज क्षेत्र के सबसे संवेदनशील हिस्सों से बचाकर ले जाने की कोशिश की जा रही है।

Hormuz में ईरान का सेफ कॉरिडोर प्लान

यह रास्ता पूरी तरह खुला नहीं है और केवल सीमित संख्या में जहाजों को ही अनुमति दी जा रही है। ईरानी अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद ही जहाज इस मार्ग में प्रवेश कर सकते हैं। इस व्यवस्था का मकसद युद्ध के माहौल में समुद्री व्यापार को पूरी तरह ठप होने से बचाना माना जा रहा है। समुद्री सूचना एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अब तक कम से कम नौ जहाज इस सुरक्षित गलियारे का इस्तेमाल कर चुके हैं। इनमें भारतीय ध्वज वाले तीन गैस टैंकर भी शामिल बताए गए हैं। इन जहाजों के नाम शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी बताए गए हैं।

शिपिंग डेटा के अनुसार, इन टैंकरों ने सामान्य समुद्री मार्ग के बजाय ईरान के निगरानी वाले क्षेत्रीय जल का रास्ता चुना। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि सामान्य मार्ग पर सुरक्षा जोखिम ज्यादा माना जा रहा था।

चुकाई बड़ी रकम

रिपोर्ट्स के अनुसार इस कॉरिडोर का उपयोग करने के लिए कुछ जहाज ऑपरेटरों ने भारी रकम भी खर्च की है। एक टैंकर ऑपरेटर ने सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए लगभग 20 लाख डॉलर तक भुगतान किया। हालांकि कई मामलों में यह मंजूरी सीधे कूटनीतिक बातचीत के जरिए भी हासिल की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के माहौल में शिपिंग कंपनियां जोखिम कम करने के लिए अतिरिक्त खर्च करने को भी तैयार हैं।

सुरक्षा की गारंटी फिर भी नहीं

हालांकि, ईरान इस मार्ग को सुरक्षित बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री विशेषज्ञ इसे पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं मान रहे। उनका कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय अलग-अलग सैन्य इकाइयों के कारण स्थिति कभी भी बदल सकती है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ती सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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