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Gupt Navratri 19 जनवरी से होगी शुरू, साधना की गोपनीयता बनाए रखना है जरूरी; जानें नियम

Gupt Navratri
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Gupt Navratri 2026 : इस वर्ष माघ मास की गुप्त नवरात्र 19 जनवरी से आरंभ होकर 28 जनवरी तक चलेगी। यह नवरात्र सामान्य नवरात्रों से अलग मानी जाती है, क्योंकि इसमें बाहरी दिखावे के बजाय आंतरिक साधना पर जोर दिया जाता है। तांत्रिक परंपरा से जुड़े साधक, अघोरी और विशेष मंत्र-साधना करने वाले लोग इस अवधि को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन आम श्रद्धालु भी इसमें माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

गुप्त नवरात्र को अक्सर केवल तंत्र साधना से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सच्चे मन से की गई पूजा हर व्यक्ति के लिए फलदायी होती है। माना जाता है कि जो भक्त नियमपूर्वक माता की आराधना करता है, उसे सुख, शांति, स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती का आशीर्वाद मिलता है।

Gupt Navratri 19 जनवरी से होगी शुरू

गुप्त नवरात्र का मूल सिद्धांत ही “गुप्तता” है। इस साधना का सबसे अहम नियम यही माना गया है कि अपनी पूजा, मंत्र, व्रत या संकल्प की जानकारी किसी को न दी जाए। धार्मिक मान्यता है कि साधना का प्रचार करने से उसका प्रभाव क्षीण हो जाता है और फल अधूरा रह सकता है। इसी कारण इसे पूर्ण रूप से निजी रूप में करने की परंपरा है। यदि इस दौरान घर में अखंड ज्योति जलाई जाती है, तो विशेष सावधानी बरतनी जरूरी मानी जाती है। घर को लंबे समय तक खाली छोड़ना उचित नहीं माना जाता। दीपक की शुद्धता, तेल या घी की निरंतरता और आसपास की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

शुद्धता अनिवार्य

गुप्त नवरात्र की साधना केवल बाहरी पूजा तक सीमित नहीं है। इसमें साधक का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। प्रतिदिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना, पूजा स्थल को पवित्र रखना और मन में नकारात्मक विचारों को दूर रखना आवश्यक माना गया है। क्रोध, अपशब्द, झूठ और किसी का अपमान इस साधना में बाधक माने जाते हैं। नवरात्र के नौ दिनों में मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक पदार्थों से दूरी बनाने की परंपरा है। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन भी अत्यंत आवश्यक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का उल्लंघन करने से साधना का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।

मिलता है पूरा फल

जो व्यक्ति नियम, संयम और विश्वास के साथ माता की उपासना करता है, उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि गुप्त नवरात्र को साधना का सबसे गहन काल माना जाता है।

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