Dehradun Airport Incident : उत्तराखंड की राजधानी में स्थित Jolly Grant Airport पर शनिवार शाम एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी समस्या सामने आ गई। जानकारी के अनुसार Skyhop Aviation का सी-प्लेन शाम करीब साढ़े चार बजे ट्रेनिंग फ्लाइट के लिए रनवे पर दौड़ रहा था। इसी दौरान विमान के पहिए से चिंगारी निकलती दिखाई दी। स्थिति को भांपते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को आगे बढ़ाने के बजाय रनवे पर ही रोक दिया। विमान के पहिए से चिंगारी निकलने की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया।
सुरक्षा के मद्देनजर हवाई अड्डे के दमकल विभाग को अलर्ट कर दिया गया। कुछ ही मिनटों में दमकल वाहन और सुरक्षा टीम रनवे पर पहुंच गई। अधिकारियों ने किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए विमान को वहीं रोके रखा और स्थिति का आकलन किया।
Dehradun Airport Incident
एहतियात के तौर पर विमान को रनवे से हटाकर किनारे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद इसे हैंगर के पास पार्क कर दिया गया ताकि तकनीकी जांच की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, घटना के दौरान किसी तरह की दुर्घटना या नुकसान नहीं हुआ और सभी लोग सुरक्षित रहे। शुरुआती जांच में यह तकनीकी गड़बड़ी मानी जा रही है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है। एयरपोर्ट निदेशक Bhupesh CH Negi ने बताया कि सी-प्लेन नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। रनवे पर दौड़ते समय उसके पहिए में तकनीकी दिक्कत के कारण चिंगारी दिखाई दी। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पायलट ने तुरंत विमान को रोक दिया और बाद में उसे रनवे के किनारे सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर दमकल विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
पहली बार सामने आई ऐसी समस्या
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार देहरादून एयरपोर्ट पर यह पहली बार है जब किसी सी-प्लेन के पहिए में इस तरह की तकनीकी परेशानी देखने को मिली है। हालांकि समय रहते पायलट की सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कोई बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल विमान की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। सी-प्लेन एक विशेष प्रकार का विमान होता है जो सामान्य हवाई जहाज की तरह उड़ान भरता है, लेकिन इसकी बनावट थोड़ी अलग होती है। इसके नीचे बड़े फ्लोट या तैरने वाले हिस्से लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह पानी की सतह पर उतर सकता है और उड़ान भर सकता है। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर इसे सामान्य रनवे पर भी उतारा जा सकता है। यही वजह है कि पर्यटन और दूरदराज के क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है।
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