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गौरी गणेश चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का जाप, गणेश भगवान की कृपा से बरसाने लगेगी घर में खुशियां

Gauri Ganesh Chaturthi:- हिंदू धर्म में गणेश भगवान को सर्वप्रथम पूजे जाने वाले देवता माना जाता है। हर शुभ कार्य में गणेश भगवान को सबसे पहले पूजा जाता है। वैदिक पंचांग की माने तो माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गौरी गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन अगर आप भगवान गणेश को प्रसन्न करते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं तो ऐसे में आपके जीवन में सुख और सौभाग्य के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने लगेगा।

अगर इस दौरान पूजा करते हैं और विशेष मंत्रो का जाप करते हैं तो भगवान गणेश की कृपा आप पर बरसने लगती है। भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए आपको इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। आइए इन मंत्रो के बारे में जानते है।

कब मनाई जाएगी गौरी गणेश चतुर्थी?

वैदिक पंचांग की माने तो गौरी गणेश चतुर्थी आने वाली 22 जनवरी यानी कि गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह गौरी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अगर आप पूरे मन और श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा आराधना करते हैं और मां आदिशक्ति दुर्गा को प्रसन्न करते हैं तो आपके जीवन में सब कुछ शुभ होने लगेगा और आपके घर में खुशियों का आगमन होगा।

गणेश मंत्र

1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥

2. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

3. ‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।

धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

4. ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

5. दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।

धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥

6. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

7. “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा ।”

8. गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।

द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥

विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।

द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌ ॥

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌ ।

9. ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

10. ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

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