PM National Bal Puraskar 2026 : देशभर के प्रतिभाशाली बच्चों को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन और नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने किसी क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल कर देश और समाज का गौरव बढ़ाया है। इच्छुक अभिभावक, स्कूल और संस्थाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पात्र बच्चों का नामांकन करा सकते हैं। वाराणसी के जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार बच्चों के लिए देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।
इसका उद्देश्य कम उम्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों की प्रतिभा को पहचान देना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे ने किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है तो उसे इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा सकता है।
PM National Bal Puraskar 2026
इस वर्ष पुरस्कार छह प्रमुख श्रेणियों में प्रदान किया जाएगा। इनमें वीरता, खेलकूद, सामाजिक सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण तथा कला एवं संस्कृति शामिल हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्रेणी में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्होंने किसी नए उत्पाद, मॉडल, प्रोटोटाइप, अनुसंधान या नवाचार के माध्यम से विशेष उपलब्धि हासिल की हो।
सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस बार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्रेणी पर विशेष फोकस रखा गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अपील की है कि यदि किसी बच्चे ने रोबोटिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण तकनीक, विज्ञान या किसी अन्य तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय नवाचार किया है, तो उसका नामांकन अवश्य कराया जाए। इससे युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर मिलेगा।
कराएं ऑनलाइन नामांकन
महिला कल्याण विभाग, वाराणसी ने जिले के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराने की अपील की है। आवेदन और नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी और नामांकनकर्ता आधिकारिक पोर्टल awards.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक योग्य बच्चों को इस सम्मान के लिए आगे लाकर उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाना है।





