Home » धर्म » Ajab-Gajab: आस्था या अंधविश्वास? 50 फीट ऊंचाई तक शिशु उछालने की सदियों पुरानी प्रथा!

Ajab-Gajab: आस्था या अंधविश्वास? 50 फीट ऊंचाई तक शिशु उछालने की सदियों पुरानी प्रथा!

Ajab-Gajab
Ajab-Gajab

Ajab-Gajab : महाराष्ट्र के एक धार्मिक स्थल पर जमा भीड़, ऊपर खड़ी इमारत, नीचे तनी हुई चादर और माता-पिता की गोद में एक नवजात यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि एक वास्तविक परंपरा का हिस्सा है। अचानक एक मासूम को करीब 50 फीट की ऊंचाई से नीचे फेंका जाता है। नीचे मौजूद लोग कपड़े से उसे पकड़ लेते हैं और माता-पिता इसे ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए राहत और खुशी जताते हैं। यह रस्म कई लोगों के लिए श्रद्धा का प्रतीक है, लेकिन कई इसे बच्चों की जान से खेलने जैसा मानते हैं।

इस अनुष्ठान को कुछ इलाकों में गुड लक बेबीज की परंपरा कहा जाता है। मान्यता है कि ऊंचाई से गिराए गए शिशु को अच्छा स्वास्थ्य, लंबी उम्र और जीवनभर समृद्धि का वरदान मिलता है। माता-पिता इसे अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना के रूप में करते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह आस्था से अधिक जोखिम और अंधविश्वास पर आधारित है।

Ajab-Gajab: आस्था या अंधविश्वास?

भारत के महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में यह प्रथा लंबे समय से देखी जाती रही है। धार्मिक मेलों, मंदिरों और दरगाहों के दौरान नवजात बच्चों को ऊंचाई से नीचे गिराने की रस्म निभाई जाती है। लोगों का विश्वास है कि इससे बच्चे पर दैवीय कृपा बनी रहती है। हालांकि, समय के साथ इसकी ऊंचाई कम की गई है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी भी उम्र के बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं है। यह केवल भारत तक सीमित परंपरा नहीं है। तुर्किये के कुछ समुदायों में भी बच्चों को ऊंचाई से गिराने जैसी प्रथाएं देखी गई हैं, जहां इसे धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में निभाया जाता है। हालांकि, वहां की सरकारें ऐसी परंपराओं को नियंत्रित करने और बच्चों की सुरक्षा करने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं।

कानून और बाल अधिकार संगठनों की सख्त आपत्ति

भारत में बाल अधिकार संगठनों और सरकारी संस्थाओं ने इस तरह की प्रथाओं को खतरनाक और गैरकानूनी करार दिया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) सहित कई एजेंसियां इसे बाल शोषण का रूप मानती हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर बच्चों की जान जोखिम में डालना स्वीकार्य नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई से गिराए जाने के दौरान शिशुओं को गंभीर चोट लग सकती है या उनकी जान भी जा सकती है। इसके अलावा, इस तरह के अनुभव का बच्चों के मानसिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि नवजात का शरीर बेहद नाजुक होता है और मामूली झटका भी गंभीर परिणाम ला सकता है।

जारी विवाद

हाल के वर्षों में उत्तर कर्नाटक के कुछ इलाकों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां धार्मिक मेलों के दौरान इस परंपरा को निभाया गया। हालांकि, अब ऊंचाई को कम किया गया है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जोखिम अब भी बना हुआ है। कई संगठनों ने मांग की है कि ऐसी प्रथाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।

यह प्रथा आस्था और परंपरा के नाम पर वर्षों से चली आ रही है, लेकिन समय के साथ समाज में यह सवाल भी गहराता जा रहा है कि क्या धार्मिक विश्वास बच्चों की सुरक्षा से ऊपर हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि परंपराओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन जब बात मासूमों की जान की हो, तो तर्क, विज्ञान और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Headlines India News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Read More : India-EU ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल, कपड़े सहित प्रोसेस्ड फूड जैसे कई उत्पाद होंगे सस्ते; बढ़ेगी व्यापारियों की चिंता!

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?