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UP Election में अंसारी परिवार के गढ़ में इस बार किसका चलेगा जादू? जानिए चुनाव का असली गणित

Akhilesh Yadav vs Yogi Adityanath

UP Election : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां राजनीतिक दलों की ताकत के साथ जातीय समीकरण, स्थानीय प्रभाव और बाहुबल से जुड़ी चर्चाएं भी चुनावी माहौल को प्रभावित करती रही हैं। अंसारी परिवार का लंबे समय तक इस सीट पर दबदबा रहा है, लेकिन भाजपा की चुनौती ने मुकाबले को लगातार कड़ा बनाया है। आगामी चुनाव में भी यही देखना अहम होगा कि मतदाताओं का रुख किस तरफ जाता है। बता दें कि मोहम्मदाबाद सीट को अंसारी परिवार का पारंपरिक राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।

Akhilesh Yadav vs Yogi Adityanath

अफजाल अंसारी ने 1985 से 1996 के बीच पांच बार जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कृष्णानंद राय ने उन्हें हरा दिया। वर्ष 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय विधायक बनीं। उन्होंने 2017 के चुनाव में भी जीत हासिल की।

UP Election

पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे शोएब अंसारी, जिन्हें मन्नू अंसारी के नाम से भी जाना जाता है, ने अलका राय को करीब 19 हजार मतों से हराया था। इस जीत के साथ सपा ने सीट पर अपना कब्जा जमाया। अब आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियों और संभावित गठबंधनों पर नजर बनी हुई है। मौजूदा विधायक शोएब अंसारी का आरोप है कि विपक्षी दल का प्रतिनिधि होने के कारण उन्हें विकास कार्यों के लिए अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता और फंड से जुड़े मामलों में बाधाएं आती हैं।

उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद वह क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में शामिल रहते हैं। दूसरी ओर, भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश राय का दावा है कि योगी सरकार में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और पारदर्शी नीतियों के जरिए काम किया गया है। उनका कहना है कि आगामी चुनाव में भाजपा जिले की सभी सात सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है।

जातीय समीकरण बन सकते हैं निर्णायक

इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 3.83 लाख मतदाता होने का दावा किया जाता है। उपलब्ध अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, भूमिहार मतदाताओं की संख्या सबसे प्रभावशाली समूहों में गिनी जाती है। इसके अलावा ब्राह्मण, राजपूत, बनिया, दलित, मुस्लिम और यादव मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। राजभर, बिंद, मल्लाह और निषाद जैसी अति पिछड़ी जातियों का समर्थन भी उम्मीदवारों के लिए अहम माना जाता है। हालांकि, इन समूहों के सटीक आंकड़ों और चुनाव में उनके रुख की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

बदल सकती है तस्वीर

पिछले चुनाव में सुभासपा का सपा के साथ गठबंधन रहा था, जिससे विपक्षी वोटों के समीकरण पर असर पड़ा। अब ओम प्रकाश राजभर की पार्टी एनडीए के साथ है, इसलिए आगामी चुनाव में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा अतुल राय के परिवार से किसी संभावित उम्मीदवार की एंट्री की चर्चाएं मुकाबले को नया मोड़ दे सकती हैं। हालांकि, उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के बिना त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना को अंतिम नहीं माना जा सकता।

मोहम्मदाबाद में चुनावी बहस अक्सर विकास, कानून व्यवस्था, जातीय प्रतिनिधित्व और पुराने राजनीतिक प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती है। इस बार भी सपा और भाजपा के दावों के साथ गठबंधन की स्थिति और उम्मीदवारों का चयन अहम रहेगा। आखिरकार, सीट का नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन मतदाताओं का भरोसा जीतने और अलग-अलग सामाजिक समूहों का समर्थन जुटाने में सफल होता है।

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