Israel Election 2026 : इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद देश की सुरक्षा और गाजा में युद्ध को लेकर सरकार पर सवाल उठे हैं। अब चुनाव में मतदाताओं का फैसला तय करेगा कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या विपक्ष को सरकार बनाने का अवसर मिलेगा।
इजरायल में प्रधानमंत्री चुनने के लिए सीधे मतदान नहीं होता। यहां 120 सदस्यों वाली संसद, नेसेट, के लिए वोट डाले जाते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में चुनाव के बाद गठबंधन की बातचीत बेहद अहम हो जाती है।
Israel Election 2026
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनकी लिकुड पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर चुनाव लड़ती रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके करीबी रिश्ते भी उनके समर्थकों के लिए अहम माने जाते हैं। हालांकि, 7 अक्टूबर के हमलों से पहले सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक और गाजा युद्ध के संचालन को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है।
नेतन्याहू इजरायल में चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमों में भी आरोपी हैं। उन पर धोखाधड़ी, विश्वास के उल्लंघन और रिश्वत से जुड़े आरोप हैं, जिन्हें वह खारिज करते रहे हैं। 2024 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने भी उनके खिलाफ युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों से संबंधित गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
बन सकते हैं विकल्प
नेतन्याहू को चुनौती देने वाले गादी आइजेनकोट इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख हैं। करीब चार दशक सेना में बिताने के बाद उन्होंने 2022 में राजनीति में कदम रखा। वह मध्यमार्गी याशार! पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख रखते हैं। गाजा युद्ध के दौरान उनके बेटे और दो भतीजों की मौत ने उनके परिवार को गहरा नुकसान पहुंचाया। नेतन्याहू की युद्ध नीति से मतभेद के चलते आइजेनकोट ने युद्ध कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। उनका आरोप रहा कि प्रधानमंत्री के पास युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति नहीं है।
लैपिड की भूमिका भी अहम
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी चुनावी मुकाबले में महत्वपूर्ण चेहरा हैं। वह यायर लैपिड के साथ गठबंधन कर नेतन्याहू विरोधी मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। बेनेट फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश बनाने का विरोध करते हैं और वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के समर्थन के लिए जाने जाते हैं। बेनेट 2021 में गठबंधन सरकार के जरिए प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, नेतन्याहू से उनके राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। चुनाव में उनका और लैपिड का गठबंधन कितना समर्थन जुटा पाता है, यह सरकार गठन को प्रभावित कर सकता है।
इस चुनाव में केवल प्रधानमंत्री का चेहरा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा नीति, गाजा युद्ध और राजनीतिक गठबंधन भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। अंतिम तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सा दल या गठबंधन नेसेट में बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाता है।
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