Congress News : उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन भी किया जा रहा है, लेकिन नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के लिए परेशानी बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस कार्यालय में हुई कहासुनी और मारपीट के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अजय राय कांग्रेस में बने रहेंगे या आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
बता दें कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के कार्यभार संभालने के दौरान पार्टी कार्यालय में विवाद हो गया था। कार्यक्रम में कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी के बाद मारपीट की बात सामने आई।
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इस घटना के बाद कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। कुछ लोग इसके लिए अजय राय के समर्थकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस विवाद के बीच अजय राय के दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च में शामिल नहीं होने की बात भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के लिए दिल्ली बुलाया था, लेकिन अजय राय कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी नेतृत्व से कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।
ममता चौधरी ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ममता चौधरी ने अजय राय के खिलाफ राहुल गांधी और राजेंद्र पाल गौतम से शिकायत करने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजय राय का रवैया पहले भी दलित नेताओं के प्रति ठीक नहीं रहा है। ममता चौधरी के मुताबिक, पार्टी की बैठकों में दलित नेताओं के बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं की जाती थी। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और इस संबंध में अजय राय की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के पीछे समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों को भी एक संभावित वजह बताया जा रहा है।
चर्चा है कि अखिलेश यादव और अजय राय के बीच संबंध पूरी तरह सहज नहीं रहे हैं। वहीं, प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा को समाजवादी पार्टी के साथ बेहतर तालमेल बनाने में महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने इस आधार पर अध्यक्ष बदलने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।
गुजरात में मिल सकती है नई जिम्मेदारी
कांग्रेस के भीतर अजय राय को किसी दूसरे राज्य का प्रभारी बनाए जाने की अटकलें भी चल रही हैं। इनमें गुजरात का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। अजय राय लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में चुनाव लड़ते रहे हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें गुजरात में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। हालांकि, पार्टी ने अभी ऐसी किसी नियुक्ति की घोषणा नहीं की है। अजय राय के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनकी भारतीय जनता पार्टी में वापसी की संभावना पर भी सवाल उठ रहे हैं। वह पहले भाजपा से जुड़े रहे हैं और पार्टी के टिकट पर तीन बार विधायक चुने गए थे। बाद में उन्होंने भाजपा छोड़कर अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया था।
अब प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, अजय राय ने कांग्रेस छोड़ने या भाजपा में शामिल होने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है।
वाराणसी की पिंडरा सीट पर भी नजर
अजय राय का राजनीतिक आधार वाराणसी में रहा है। वह यहां की विधानसभा राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी नजर पिंडरा सीट पर भी हो सकती है। ऐसे में उनके लिए पार्टी संगठन में भूमिका के साथ अपनी चुनावी रणनीति तय करना भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उनकी ओर से भविष्य की चुनावी योजना को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस कार्यालय में हुए विवाद पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताते हुए पार्टी पर तंज कसा।
मौर्य ने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है और ऐसी घटनाओं से पार्टी चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रही है। उनके बयान के बाद यह मामला कांग्रेस के आंतरिक विवाद के साथ राजनीतिक बयानबाजी का विषय भी बन गया है।
अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर नजर
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सामने आए विवाद ने पार्टी के भीतर मतभेदों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता चौधरी की शिकायत की बात और अजय राय की कथित नाराजगी के बीच अब शीर्ष नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अजय राय के कांग्रेस छोड़ने, भाजपा में लौटने या किसी दूसरे राज्य का प्रभारी बनने की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और अजय राय की ओर से सामने आने वाला आधिकारिक रुख ही इन अटकलों की स्थिति स्पष्ट करेगा।




