Kedarnath Cloudburst : उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। चिरबासा हेलीपैड के पास बादल फटने की घटना के बाद इलाके में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया। तेज बारिश और इसके बाद हुए भूस्खलन के कारण पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर नीचे आ गिरे। इससे केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग प्रभावित हो गया है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है। बादल फटने के बाद चिरबासा हेलीपैड के करीब 150 मीटर के दायरे में मलबा भर गया।
अचानक हुए घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर केदारनाथ यात्रा फिलहाल रोक दी है। प्रशासन और संबंधित टीमें स्थिति का जायजा ले रही हैं। मौसम में सुधार और रास्ता सुरक्षित होने के बाद ही आगे की यात्रा को लेकर फैसला लिया जाएगा।
Kedarnath में फटा बादल
भारी बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। केदारनाथ मार्ग पर बोल्डर गिरने से आवाजाही प्रभावित हुई है। इस रास्ते से बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम तक पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता मार्ग से मलबा हटाने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। केदारनाथ में बादल फटने की घटना के बीच मौसम विभाग ने उत्तराखंड के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और रास्ते बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
22 अप्रैल से शुरू हुई थी यात्रा
इस साल केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद से देशभर से भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मानसून के दौरान खराब मौसम के कारण कई बार यात्रा मार्ग और हेली सेवा प्रभावित हुई, लेकिन मौसम सामान्य होने पर सेवाओं को दोबारा शुरू किया जाता रहा है। केदारनाथ धाम की यात्रा सामान्य तौर पर कपाट बंद होने तक जारी रहती है। इस वर्ष भी यात्रा नवंबर तक चलने की संभावना है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार 11 नवंबर 2026 को भाई दूज के आसपास बाबा केदारनाथ के कपाट बंद किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इस साल की चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम की यात्रा का समापन हो जाएगा।
यूपी में भी बाढ़ का खतरा
उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा और यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। चार लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है। मिर्जापुर में एक पुल पानी की चपेट में आ गया है, जबकि फर्रुखाबाद में हाईवे पर भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। मध्य प्रदेश में तीन दिन के अंतराल के बाद मानसूनी गतिविधियां दोबारा तेज हुई हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भोपाल, नर्मदापुरम और विदिशा में गुरुवार रात बारिश दर्ज की गई। दमोह में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां कई इलाकों और कॉलोनियों में पानी भर गया है।
बिहार में नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य की आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 14 जिलों में बाढ़ का असर बताया गया है। करीब 2,360 गांवों में 44 लाख लोग प्रभावित हैं, जबकि लगभग 27,954 लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की चुनौती लोगों तक राहत पहुंचाने और निचले इलाकों में निगरानी बनाए रखने की है। देश के कई हिस्सों में बारिश और बाढ़ की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा है, जबकि यूपी और बिहार में नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। मध्य प्रदेश में भी मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।
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