Teesta Master Plan : बांग्लादेश का महत्वाकांक्षी तीस्ता मास्टर प्लान अब केवल जल प्रबंधन से जुड़ी योजना नहीं रह गया है। इस प्रोजेक्ट को लेकर चीन और भारत के बीच पहले से ही रणनीतिक दिलचस्पी बनी हुई है। अब अमेरिका की सक्रियता ने इसे और ज्यादा अहम बना दिया है। पिछले करीब दो महीनों में तीन अमेरिकी टीमों के तीस्ता और रंगपुर क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी सामने आई है। हाल ही में पांच सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने रंगपुर और तीस्ता इलाके का दौरा किया।
यह टीम 10 सितंबर को क्षेत्र से रवाना हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे एक दिन पहले अमेरिकी सेना से जुड़े जल-संसाधन इंजीनियर केल्विन ट्रेबोर फेसोज क्रीज ने तीस्ता बैराज प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया था। उनके साथ ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास के चार अधिकारी भी मौजूद थे।
Teesta Master Plan
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश जल विकास बोर्ड के इंजीनियरों के साथ मुलाकात की। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अमेरिकी टीम ने प्रोजेक्ट की तकनीकी स्थिति, जल प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई है। अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि 31 अगस्त को बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रेंट किस्टेंसन ने तीस्ता बैराज का दौरा किया था।
उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। इस दौरान उन्होंने तीस्ता नदी को उत्तर बांग्लादेश की जीवनरेखा बताया था। बांग्लादेश जल विकास बोर्ड से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अमेरिका इस योजना को रणनीतिक और भू-राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रहा है।
भारत की नजर मास्टर प्लान पर
तीस्ता प्रोजेक्ट भारत के लिए भी बेहद संवेदनशील है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में प्रोजेक्ट में किसी बाहरी शक्ति की बढ़ती भूमिका पर भारत की नजर होना स्वाभाविक है। रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस परियोजना के लिए भारत को प्राथमिकता दी थी। शेख हसीना सरकार के बाद तीस्ता मास्टर प्लान को लेकर चीन की भूमिका चर्चा में आई। चीन की सरकारी कंपनी सिनोहाइड्रो ने परियोजना से जुड़ी तकनीकी स्टडी पहले ही पूरी कर ली है। ऐसे में लंबे समय से यह संभावना जताई जाती रही है कि बांग्लादेश इस परियोजना में चीन की मदद ले सकता है। हालांकि, अंतिम समझौते की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
लागू करने की बात
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान तीस्ता परियोजना को प्रमुख एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था। इसके बाद BNP सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि बांग्लादेश अपने संसाधनों और फंड से इस परियोजना को आगे बढ़ा सकता है। इसी बीच अमेरिकी टीमों की लगातार आवाजाही ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बांग्लादेशी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी टीमों ने तीस्ता क्षेत्र से जुड़ा तकनीकी डेटा और अन्य जानकारियां जुटाई हैं। साथ ही परियोजना में तकनीकी सहयोग की संभावनाओं को लेकर भी रुचि दिखाई गई है। अगर अमेरिका इस प्रोजेक्ट में औपचारिक भूमिका की ओर बढ़ता है तो तीस्ता मास्टर प्लान का स्वरूप काफी बदल सकता है।
अमेरिका की एंट्री अहम
तीस्ता मास्टर प्लान में अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी ऐसे समय में सामने आई है, जब चीन पहले से इस परियोजना में तकनीकी स्तर पर मौजूद है और भारत पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। ऐसे में बांग्लादेश के सामने तीन बड़े देशों के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तारिक रहमान सरकार इस रणनीतिक परियोजना को चीन के साथ आगे बढ़ाएगी, अमेरिका से तकनीकी सहयोग लेगी या अपने फंड से इसे लागू करने का रास्ता चुनेगी।
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