Ayodhya Ram Mandir : राम मंदिर में बाल स्वरूप में विराजमान रामलला की सेवा और मंदिर की दैनिक पूजा व्यवस्था को लेकर लगातार नए बदलाव किए जा रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अब रामलला की रोजाना सेवा को और व्यवस्थित करने के साथ गर्भगृह की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में गर्भगृह में हवा के बेहतर आवागमन के लिए खिड़की लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा रामलला की दैनिक पूजा में भक्ति पदों को शामिल किया गया है और पुजारियों के लिए नई वेशभूषा लागू कर दी गई है।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर की सेवा व्यवस्था से जुड़े लोगों की ओर से गर्भगृह की सुविधाओं को लेकर भी सुझाव दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में रात के समय दरवाजा बंद रहने के दौरान हवा के बेहतर आवागमन के लिए खिड़की लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
Ayodhya Ram Mandir
मंदिर की सेवा व्यवस्था से जुड़े लोगों के मुताबिक, बाल स्वरूप रामलला की सेवा में किसी तरह की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास के सुझाव पर ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने सुविधाओं को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं। ट्रस्ट के सहयोगी जगदीश आफले को इन व्यवस्थाओं को अमल में लाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही गर्भगृह में दो टावर एसी लगाने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है। यानी तापमान और वायु आवागमन को बेहतर रखने के लिए मंदिर में अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। रामलला की दैनिक पूजा-अर्चना में भी बदलाव किया गया है। अब दिन की अलग-अलग सेवाओं के दौरान निर्धारित भक्ति पद और भजन गाए जा रहे हैं।
वात्सल्य भाव वाले पद
यह व्यवस्था 5 सितंबर से शुरू की गई है। सुबह रामलला को जगाने के समय प्रेम और वात्सल्य भाव वाले पद गाए जाते हैं। इसके बाद श्रृंगार और भोग के समय भी भक्ति पदों का गायन किया जाता है। रात में शयन आरती के दौरान भी भगवान को सुलाने के भाव से पद गाए जाते हैं। इस तरह सुबह जागरण से लेकर रात के शयन तक रामलला की सेवा में भक्ति संगीत को शामिल किया गया है। इस व्यवस्था में रामलला के बाल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए सेवा और वात्सल्य का भाव प्रमुख रखा गया है। इससे मंदिर की दैनिक पूजा पद्धति में आरती और मंत्रोच्चार के साथ पारंपरिक भक्ति गायन भी जुड़ गया है।
लागू हुआ नया ड्रेस कोड
रामलला की सेवा में लगे पुजारियों की वेशभूषा में भी बदलाव किया गया है। जन्माष्टमी के दिन से नई ड्रेस व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब पुजारी पीले रंग का रेशमी अचला और उत्तरीय धारण कर रहे हैं। इसमें धोती के साथ कंधे पर उत्तरीय वस्त्र रखा जाता है। इससे पहले पुजारी चौबंदी पहनकर पूजा-अर्चना करते थे। नई वेशभूषा का उद्देश्य पूजा व्यवस्था में एकरूपता और अनुशासन बनाए रखना है। रामलला की सेवा में शामिल पुजारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड के अनुसार ही पूजा-अर्चना करने की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं का स्वागत
मंदिर की व्यवस्थाओं में श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रसाद वितरण के दौरान रामभक्तों का तिलक लगाकर स्वागत करने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इससे दर्शन के साथ श्रद्धालुओं के स्वागत और धार्मिक परंपरा से जुड़े अनुभव को भी और व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है। राम मंदिर में किए जा रहे इन बदलावों में तीन पहलू प्रमुख हैं—रामलला की बाल स्वरूप सेवा, धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की सुविधा।
गर्भगृह में हवा के बेहतर आवागमन की तैयारी सुविधा से जुड़ी है। पुजारियों की नई वेशभूषा पूजा व्यवस्था में एकरूपता लाने की दिशा में कदम है। वहीं जागरण से शयन तक भक्ति पदों का गायन रामलला की दैनिक सेवा में वात्सल्य और भक्ति का भाव बढ़ाने की कोशिश है। अयोध्या का राम मंदिर अब नियमित पूजा, सेवा और धार्मिक अनुशासन की व्यवस्थाओं को भी लगातार विकसित कर रहा है। रामलला की सेवा से जुड़े ये बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।




