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Nepal Flood Update: नेपाल में फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा, थेरांग नदी उफनी; 5 हजार अब भी लापता

Nepal Flood Update

Nepal Flood Update : नेपाल में 26 अगस्त की भीषण बाढ़ के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुए हैं कि एक बार फिर कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रविवार सुबह पहाड़ी जिले गोरखा में थेरांग नदी का पानी अचानक बढ़ गया। इसके बाद प्रशासन ने बूढ़ीगंडकी नदी बेसिन के आसपास अलर्ट जारी किया है। बाढ़ के तेज बहाव में चार घर और एक सस्पेंशन ब्रिज बह गए। हालांकि, प्रशासन के मुताबिक घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पानी बढ़ने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था।

Nepal Flood Update

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चल रहा है। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

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आपदा से नेपाल को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। शुरुआती अनुमान में नुकसान करीब 400 अरब नेपाली रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। प्रभावित इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार शनिवार शाम 6 बजे तक राहत और बचाव अभियान के दौरान 13,101 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत, खोज और बचाव का काम लगातार जारी है।

बाढ़ का असर

प्राकृतिक आपदा का असर अब नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान होटल और ट्रैवल कंपनियों को बुकिंग रद्द होने का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल के पर्यटन क्षेत्र के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण बाजार है। नेपाल सरकार के 2024 के पर्यटन आंकड़ों के मुताबिक उस साल देश में 11.48 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। इनमें 3.18 लाख भारतीय थे, जो कुल विदेशी पर्यटकों का करीब 27.7 प्रतिशत है।

भारत के बाद अमेरिका से 9.69 प्रतिशत और चीन से 8.88 प्रतिशत पर्यटक नेपाल पहुंचे। ऐसे में भारतीय पर्यटकों की संख्या में किसी भी बड़ी गिरावट का असर नेपाल के पर्यटन कारोबार पर पड़ सकता है।

4 ग्लेशियल झीलों को खाली करने की तैयारी

26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे को भी चर्चा में ला दिया है। नेपाल चार खतरनाक ग्लेशियल झीलों का जलस्तर कम करने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस परियोजना में कोशी और गंडकी बेसिन की चार झीलों को शामिल किया गया है। इनमें लुमडिंग त्शो और होंगु-2 सोलुखुम्बु, लोअर बरुण संखुवासभा और थुलागी (डोना) मनांग में स्थित हैं। ICIMOD और UNDP की 2020 की रिपोर्ट में नेपाल, तिब्बत और भारत की 47 ग्लेशियल झीलों को फटने के लिहाज से बेहद खतरनाक बताया गया था। इनमें 21 झीलें नेपाल में थीं।

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल झीलों का जलस्तर कम करना पर्याप्त नहीं होगा। बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए प्रत्येक झील का अलग-अलग अध्ययन, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, पानी के बहाव को नियंत्रित करने के उपाय और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निर्माण पर नियंत्रण भी जरूरी है।

‘Nepal Calling’ कैंपेन

बाढ़ और तबाही की तस्वीरें सामने आने के बाद कई विदेशी पर्यटकों के बीच यह धारणा बन रही है कि पूरा नेपाल आपदा से प्रभावित है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए नेपाल सरकार ने #NepalCalling कैंपेन शुरू किया है। सरकार का कहना है कि काठमांडू, पोखरा, चितवन, लुंबिनी, जनकपुर, अन्नपूर्णा और एवरेस्ट समेत ज्यादातर प्रमुख पर्यटन स्थल और एयरपोर्ट खुले हैं। हालांकि लांगटांग, गोसाइंकुंडा, हेलंबू सर्किट और तामांग हेरिटेज ट्रेल जैसे कुछ रूट प्रभावित या प्रतिबंधित हैं। NDRRMA के शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ से करीब 7,570 घर प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा लगभग 55 किलोमीटर सड़कें, 37 सड़क पुल और 68 झूला पुल टूटे या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

बाढ़ का असर कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। करीब 1,806 हेक्टेयर खेती की जमीन प्रभावित हुई है। वहीं 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, एक सोलर प्रोजेक्ट और दो बिजली ट्रांसमिशन लाइनें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन नुकसान के चलते करीब 783 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने का शुरुआती अनुमान है।

8 अरब रुपये की जरूरत

नेपाल सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार बाढ़ प्रभावित लोगों के बचाव, राहत और तत्काल प्रबंधन के लिए अगले छह महीनों में करीब 8 अरब नेपाली रुपये की जरूरत पड़ सकती है। सरकार अब PDNA (Post-Disaster Needs Assessment) रिपोर्ट के आधार पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए जरूरी राशि जुटाने की योजना तैयार करेगी। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ नुकसान का विस्तृत आकलन भी जारी है।

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