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Kanwar Yatra 2026: किसी ने नोटों से सजाई कांवड़, कोई 411 दिन में करेगा 2400 KM की तपस्या

Kanwar Yatra 2026 : कांवड़ यात्रा-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में आस्था के दो ऐसे अनोखे रूप देखने को मिले, जिन्होंने हजारों श्रद्धालुओं और राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक ओर दिल्ली से आए शिवभक्त की नोटों से सजी कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही, तो दूसरी ओर मेरठ के 65 वर्षीय श्रद्धालु अपनी कठिन तपस्या से हर किसी को भावुक कर गए। दोनों की यात्रा का उद्देश्य अलग जरूर है, लेकिन केंद्र में भगवान शिव के प्रति समर्पण और सेवा की भावना ही दिखाई दी। दिल्ली के हर्ष विहार निवासी दीपांशु अपने साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं।

उनकी कांवड़ को 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोटों से इस तरह सजाया गया है कि दूर से देखने पर पूरी कांवड़ नोटों की चादर से ढकी हुई नजर आती है। मुज़फ्फरनगर पहुंचते ही इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और कई श्रद्धालु फोटो व वीडियो बनाते दिखाई दिए।

Kanwar Yatra 2026

दीपांशु का कहना है कि कांवड़ में लगाए गए नोट केवल सजावट नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा का प्रतीक हैं। उन्होंने कभी यह नहीं गिना कि कुल कितनी राशि लगी है। उनका कहना है कि जलाभिषेक पूरा होने के बाद कांवड़ में लगे सभी नोट हर्ष विहार स्थित मंदिर में दान कर दिए जाएंगे। इसी राशि से भंडारे का आयोजन होगा, ताकि शिवभक्तों की सेवा की जा सके। पूरी यात्रा के दौरान वह स्वयं कंधे पर कांवड़ उठाए हुए हैं, जबकि उनके चार साथी सहयोग कर रहे हैं।

2400 KM की यात्रा

इसी यात्रा के बीच मेरठ निवासी 65 वर्षीय हरपाल नाथ भी लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। वह हरिद्वार से 33 लीटर गंगाजल लेकर घुटनों के बल रेंगते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। उनके साथ चार पहियों वाली विशेष कांवड़ है, जिसमें गंगाजल के अलावा उनकी जरूरत का सामान रखा हुआ है। कांवड़ पर भगवान शिव की ध्वजा के साथ तिरंगा भी लगा है, जो उनकी राष्ट्रभक्ति और आस्था दोनों को दर्शाता है।

411 दिन की तपस्या

हरपाल नाथ के अनुसार यह उनकी तीसरी कठिन कांवड़ यात्रा है। इस बार वह करीब 411 दिनों में लगभग 2400 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यात्रा के दौरान वह संभलहेड़ा शिवधाम, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में गंगाजल अर्पित करेंगे। उनका कहना है कि यह यात्रा किसी निजी इच्छा के लिए नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।

सेवा की भावना

हरपाल नाथ बताते हैं कि पूरी यात्रा के दौरान रास्ते में मिलने वाले शिवभक्त भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। उनके मुताबिक कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर श्रद्धालु दूसरे शिवभक्त की सेवा को भगवान भोलेनाथ की सेवा मानता है। यही भावना इस यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समर्पण और मानव सेवा का भी सबसे बड़ा उदाहरण बनाती है।

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