Kukrail Night Safari Project : उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त राहत दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि परियोजना आगे बढ़ सकती है, लेकिन इसके लिए पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि कुकरैल क्षेत्र का 71 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा और बिना सक्षम वन प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। 15 जुलाई को दिए गए आदेश को शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
यदि किसी स्थान पर पेड़ हटाना अत्यंत आवश्यक हो, तो उससे पहले परियोजना की डिजाइन में बदलाव, मार्ग परिवर्तन या अन्य इंजीनियरिंग विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना होगा। यदि किसी पेड़ की कटाई अपरिहार्य हो, तो उसे न्यूनतम स्तर तक सीमित रखा जाएगा।
Kukrail Night Safari Project
हटाए जाने वाले पेड़ों की संख्या का सत्यापन वन विभाग और निगरानी समिति संयुक्त रूप से करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन पेड़ों के बदले नए पौधे लगाए जाएंगे, उनकी कम से कम पांच वर्षों तक नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि उनका जीवित रहना सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही परियोजना में ऐसी प्रकाश व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वन्यजीवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हाई-ल्यूमेन और दूर तक फैलने वाली तेज रोशनी के उपयोग पर रोक लगाने को भी कहा गया है।
CSC करेगी निगरानी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने परियोजना की निगरानी का दायित्व केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) को सौंपा है। समिति समय-समय पर परियोजना स्थल का निरीक्षण करेगी और पहली अनुपालन रिपोर्ट 28 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल परियोजना को प्रारंभिक अनुमति देने से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को पर्यावरणीय दृष्टि से पूरी तरह अंतिम स्वीकृति मिल गई है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी कानून पहले की तरह लागू रहेंगे और भविष्य में यदि कोई विवाद या आपत्ति सामने आती है तो उसका निपटारा संबंधित प्राधिकरणों या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के स्तर पर किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट में मामला
कुकरैल आरक्षित वन में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता आलोक सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद अदालत ने विशेषज्ञ समिति से रिपोर्ट मंगाई और राज्य सरकार सहित सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कड़ी शर्तों के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। इससे पहले एनजीटी ने दिसंबर 2024 में कुकरैल आरक्षित वन में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
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