UP News : उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। मलिहाबाद की दशहरी, लंगड़ा, चौसा और सफेदा जैसी पारंपरिक किस्में वर्षों से लोगों की पसंद रही हैं। अब पूर्वांचल के संतकबीर नगर ने भी आम की खेती में नई पहचान बनाई है। जिले के बघौली क्षेत्र के शिवापार गांव के प्रगतिशील किसान हरिशंकर यादव ने दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल जापानी मियाजाकी आम की सफल खेती कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उनकी इस पहल को प्रदेश में हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
हरिशंकर यादव ने करीब दो वर्ष पहले मियाजाकी प्रजाति के तीन पौधे लगाए थे। वैज्ञानिक तरीके से देखभाल और उचित पोषण देने के बाद अब इन पेड़ों पर लाल-बैंगनी रंग के आकर्षक फल तैयार हुए हैं।
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प्रत्येक फल का वजन लगभग 200 से 250 ग्राम तक है। किसान का कहना है कि यह प्रयोग सफल होने के बाद अब भविष्य में इस किस्म की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना है। उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए भी नई संभावनाओं का रास्ता खोल रही है। मियाजाकी आम की उत्पत्ति जापान के मियाजाकी प्रांत में हुई है। इसे जापानी भाषा में ‘ताइयो नो टोमागो’, यानी ‘एग ऑफ द सन’ भी कहा जाता है। पकने के बाद इसका रंग सामान्य आमों की तरह पीला नहीं बल्कि गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए होता है। बेहतरीन स्वाद, सीमित उत्पादन और प्रीमियम गुणवत्ता के कारण इसे दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे फलों में गिना जाता है।
लाखों रुपये किलो तक कीमत
मियाजाकी आम की ऊंची कीमत के पीछे इसकी विशेष खेती, सीमित उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग प्रमुख कारण हैं। इसे नियंत्रित जलवायु और विशेष तकनीक से उगाया जाता है, जबकि प्रत्येक फल की गुणवत्ता पर अलग से निगरानी रखी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। वहीं भारत में गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर इसका मूल्य 70 हजार से 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया जाता है।
पोषण से भरपूर
मियाजाकी आम केवल अपनी कीमत ही नहीं, बल्कि पोषण गुणों के कारण भी खास माना जाता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल में भी इस प्रीमियम किस्म ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। संतकबीर नगर के किसान हरिशंकर यादव की यह सफलता इस बात का संकेत है कि वैज्ञानिक तकनीक और नवाचार अपनाकर उत्तर प्रदेश के किसान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग वाले उच्च मूल्य के फलों का उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
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