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Noida वेस्ट मेट्रो परियोजना को मिली बड़ी रफ्तार, PIB में होगी प्रस्तुति; 5 नए स्टेशन बनने का रास्ता साफ

Noida Metro : नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) की सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 (किसान चौक) तक प्रस्तावित मेट्रो परियोजना अब अहम चरण में पहुंच गई है। 15 से 20 जुलाई के बीच नई दिल्ली में पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (PIB) के समक्ष इस परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। बैठक में परियोजना की उपयोगिता, यात्री क्षमता, लागत और वित्तीय मॉडल पर चर्चा होगी। पीआईबी से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।

प्रस्तावित मेट्रो लाइन लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत करीब 900 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कॉरिडोर पर कुल पांच नए स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिनमें सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट का सेक्टर-4 (किसान चौक) शामिल हैं।

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यह विस्तार सेक्टर-51 से सीधे ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक परिवहन और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। यह मेट्रो विस्तार भविष्य में प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) से भी जुड़ जाएगा। इसके जरिए यात्रियों को गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक निर्बाध यात्रा की सुविधा मिलेगी। एनएमआरसी के अनुसार परियोजना पूरी होने में लगभग दो वर्ष का समय लग सकता है। इसके बाद पूरे एनसीआर क्षेत्र में परिवहन नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा।

यात्रियों को मिलेगा फायदा

एनएमआरसी का अनुमान है कि इस मेट्रो विस्तार से प्रतिदिन 1.25 लाख से अधिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौर चौक और नोएडा के बीच यात्रा करने वाले लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मिलेगा। साथ ही इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे सड़क जाम और ट्रैफिक दबाव को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

परियोजना का खर्च

एनएमआरसी के प्रबंध निदेशक कृष्णा करुणेश ने बताया कि मेट्रो परियोजनाएं केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आती हैं और पीआईबी की मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी। इस परियोजना की लागत केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण संयुक्त रूप से वहन करेंगे। चूंकि यह मौजूदा मेट्रो नेटवर्क का विस्तार है, इसलिए इसकी लागत अन्य नई परियोजनाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम रखी गई है।

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